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तीसरा विश्व युद्ध? अपने ही दोस्तों से भिड़ेंगे डोनाल्ड ट्रंप, ग्रीनलैंड पर दिया ऐसा अल्टीमेटम कि नाटो में मच गया हड़कंप

Washington: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक जिद ने पूरी दुनिया को खतरे में डाल दिया है। ट्रंप ने ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए 20 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने टॉप डिफेंस मीटिंग में साफ कह दिया है कि वे इसके लिए हथियारों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अब डर यह है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो उसे अपने ही साथी संगठन नाटो से लड़ना होगा। यह सीधे तौर पर तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हो सकती है।

नाटो का अनुच्छेद-5 बना ट्रंप की राह का रोड़ा

अमेरिकी संसद में डेमोक्रेट्स सांसदों की एक आपात बैठक हुई। इस बैठक में सांसद जेफ्रीज ने डोनाल्ड ट्रंप की योजनाओं को लेकर चेतावनी दी है। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है। अगर अमेरिकी सेना वहां घुसपैठ करती है, तो यह नाटो चार्टर के अनुच्छेद-5 का उल्लंघन होगा। नाटो का यह नियम कहता है कि यूरोप या उत्तरी अमेरिका में किसी एक सदस्य देश पर हमला, सभी सदस्यों पर हमला माना जाएगा। ऐसे में नाटो के बाकी देश अपनी सेना और हथियारों के साथ जवाब देने के लिए बाध्य होंगे।

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क्या अमेरिका पर हमला करेंगे नाटो देश?

यह स्थिति अमेरिका के लिए बहुत खतरनाक हो सकती है। जो नाटो 1949 में सोवियत संघ को रोकने के लिए बना था, अब वही डोनाल्ड ट्रंप के लिए सिरदर्द बन गया है। डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्रीनलैंड पर हमला नाटो के अस्तित्व को खत्म कर सकता है। अगर ट्रंप अपनी जिद पर अड़े रहे और जनवरी के अंत तक हमला किया, तो नाटो के देश अमेरिका पर जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। इसका मतलब है कि अमेरिका को ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे अपने ही पुराने दोस्तों से जंग लड़नी पड़ेगी।

रूस और चीन उठा सकते हैं फायदा

अमेरिका के लिए यह लड़ाई कतई आसान नहीं होगी। नाटो में शामिल ब्रिटेन और फ्रांस के पास परमाणु हथियार हैं। अगर अमेरिका का अपने इन साथियों से साथ छूटता है, तो वह पूरी तरह बैकफुट पर आ जाएगा। उधर रूस और चीन पहले से ही अमेरिका के विरोधी हैं। ये दोनों देश भी परमाणु शक्ति से संपन्न हैं। अगर नाटो देश अमेरिका के खिलाफ हुए, तो कूटनीतिक तौर पर अमेरिका दुनिया में बिल्कुल अकेला पड़ जाएगा। यूरोप और मध्य पूर्व में उसका दबदबा खत्म हो सकता है।

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दुनिया का सबसे ताकतवर संगठन है नाटो

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में शीतयुद्ध का खतरा बढ़ गया था। उस वक्त अमेरिका ने सोवियत संघ (रूस) के प्रभाव को रोकने के लिए यूरोपीय देशों के साथ मिलकर नाटो का गठन किया था। आज इस संगठन में 32 देश शामिल हैं। नाटो का संविधान कहता है कि अगर किसी एक देश पर मुसीबत आती है, तो सभी देश मिलकर उसका सामना करेंगे। लेकिन अब डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड वाली महत्वाकांक्षा ने इस 75 साल पुराने रिश्ते को दांव पर लगा दिया है।

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