शिमला वासियों की जेब पर बढ़ेगा बोझ? जानें 20 मार्च को होने वाले इस बड़े फैसले का सच

Himachal News: हिमाचल की राजधानी शिमला में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले दिन आर्थिक रूप से भारी पड़ सकते हैं। नगर निगम शिमला अब संपत्ति कर (Property Tax) में बढ़ोतरी की तैयारी कर चुका है। इस बढ़ोतरी की सटीक दर क्या होगी, इसका फैसला 22 मार्च को राज्य सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले आर्थिक सर्वेक्षण के बाद लिया जाएगा। दरअसल, प्रदेश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की विकास दर ही यह तय करेगी कि शहर के मकान मालिकों को इस साल कितना अतिरिक्त टैक्स चुकाना होगा।

जीडीपी के आंकड़ों से तय होगा नया टैक्स का गणित

नगर निगम प्रशासन 20 मार्च का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। इसी दिन विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आर्थिक सर्वेक्षण सदन की मेज पर रखा जा सकता है। इसमें पिछले वित्तीय वर्ष की आर्थिक स्थिति और जीडीपी वृद्धि का पूरा ब्योरा होगा। नियमों के मुताबिक, जीडीपी में जितनी बढ़त दर्ज की जाएगी, उसी अनुपात में संपत्ति कर की दरों को संशोधित किया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से राज्य के आर्थिक प्रदर्शन से जुड़ी हुई है।

केंद्र सरकार के सख्त नियमों का दबाव

संपत्ति कर में यह सालाना बढ़ोतरी केवल नगर निगम की मर्जी नहीं, बल्कि केंद्र सरकार का एक अनिवार्य नियम है। केंद्र ने साफ कर दिया है कि शहरी निकायों को अपनी आय के स्रोत खुद बढ़ाने होंगे। यदि नगर निगम शिमला संपत्ति कर में नियमित रूप से संशोधन नहीं करता है, तो उसे केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं और विकास परियोजनाओं के लिए मिलने वाली आर्थिक मदद रुक सकती है। अपनी वित्तीय सेहत दुरुस्त रखने के लिए निगम के पास अब टैक्स बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।

22 करोड़ की आय को और बढ़ाने की कवायद

वर्तमान में नगर निगम शिमला को संपत्ति कर के जरिए सालाना लगभग 22 करोड़ रुपये की कमाई होती है। शहर की सफाई व्यवस्था, सड़कों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट और पानी की सप्लाई जैसे बुनियादी कामों का खर्च इसी कमाई से निकलता है। निगम अधिकारियों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई और शहर के विस्तार को देखते हुए विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। ऐसे में संपत्ति कर आय का सबसे महत्वपूर्ण जरिया बन चुका है, जिसे हर साल अपडेट करना अब अनिवार्य व्यवस्था बन गई है।

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