Washington/Tehran News: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही अभी हमले की बात से इनकार कर रहे हों, लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और है। अमेरिकी सेना ने ईरान की पूरी घेराबंदी कर ली है। आसमान से लेकर समंदर तक, अमेरिकी हथियार चुपचाप ईरान के करीब पहुंच रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 31 जनवरी की तारीख ईरान के लिए बेहद भारी पड़ सकती है। युद्ध के बादल गहराते जा रहे हैं।
जॉर्डन में फाइटर जेट्स की खतरनाक तैनाती
अमेरिका ने ब्रिटेन के लेकनहेथ एयरबेस से अपने 12 खतरनाक F-15 फाइटर जेट्स को मूव कर दिया है। ये अब जॉर्डन के मुवक्कुफ साल्ती एयर बेस पर तैनात हैं। इसके साथ ही हवा में ईंधन भरने वाले KC-135 टैंकर विमान भी वहां पहुंचा दिए गए हैं। यह तैयारी किसी बड़े हवाई हमले का इशारा कर रही है।
सिर्फ 30 मिनट में तेहरान पर बमबारी!
जॉर्डन में इन जेट्स की तैनाती सामरिक रूप से बहुत अहम है। यहां से ईरान की राजधानी तेहरान की दूरी करीब 1500 किलोमीटर है। F-15 फाइटर जेट की रफ्तार 3000 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसका सीधा मतलब है कि अमेरिका सिर्फ आधे घंटे में तेहरान पर बम बरसा सकता है। यह तैनाती ईरान के लिए खतरे की घंटी है।
समंदर के रास्ते बढ़ रहा ‘मौत का बेड़ा’
आसमान के साथ-साथ समंदर में भी अमेरिका ने जाल बिछा दिया है। अमेरिका का USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तेजी से मिडिल ईस्ट की तरफ बढ़ रहा है। यह साउथ चाइना सी से रवाना हो चुका है और एक हफ्ते में ईरान के करीब पहुंच जाएगा। इस बेड़े में 90 अटैक एयरक्राफ्ट शामिल हैं। इनमें F-35, F-16 और F-22 जैसे अत्याधुनिक जेट्स, विनाशक जहाज और पनडुब्बियां शामिल हैं। लाल सागर में भी अमेरिकी डिस्ट्रॉयर्स तैनात हैं।
31 जनवरी की तारीख क्यों है खास?
इजरायली मीडिया और रक्षा विशेषज्ञों के बीच 31 जनवरी की तारीख को लेकर जबरदस्त चर्चा है। दावा किया जा रहा है कि ट्रंप इस तारीख से पहले ईरान पर बड़ा हमला कर सकते हैं। इसके पीछे कई बड़ी वजहें बताई जा रही हैं।
- ईरान हर महीने 300 मिसाइलें बना रहा है।
- ईरान को रूस से शॉर्ट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें मिली हैं।
- रूस ने S-300 और चीन ने HQ-9B एयर डिफेंस सिस्टम ईरान को दिए हैं।
अमेरिका चाहता है कि ईरान का जखीरा और ज्यादा बढ़ने से पहले उसे नष्ट कर दिया जाए।
इजरायल की सुरक्षा अभेद्य, THAAD तैनात
ईरान पर संभावित हमले को देखते हुए इजरायल की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। अमेरिका जानता है कि हमले के जवाब में ईरान इजरायल को निशाना बनाएगा। इसलिए, अमेरिका ने इजरायल को THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) मिसाइल सिस्टम की नई बैटरीज भेजी हैं। यह सिस्टम आसमान में ही मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। अब सवाल सिर्फ यह है कि ट्रंप का निशाना कौन होगा- अयातुल्लाह खामेनेई, परमाणु ठिकाने या सैन्य अड्डे?
