New Delhi News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की पेशकश की है। ट्रंप ने भारत को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) में शामिल होने का न्योता दिया है। यह बोर्ड गाजा में चल रही जंग को रोकने और वहां शांति बहाल करने के लिए बनाया जा रहा है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह निमंत्रण पत्र सौंपा है। इस बोर्ड की जिम्मेदारी गाजा में दोबारा निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था को संभालना होगी।
क्या है ट्रंप का ‘बोर्ड ऑफ पीस’?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल बोर्ड के अध्यक्ष खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होंगे। शुरुआत में यह बोर्ड केवल गाजा संघर्ष पर ध्यान देगा। बाद में इसका विस्तार दुनिया के अन्य विवादों को सुलझाने के लिए भी किया जाएगा। ट्रंप ने अपने पत्र में कहा है कि जो देश इसमें शामिल होंगे, वे इसके ‘फाउंडिंग मेंबर्स’ कहलाएंगे। यदि भारत इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो वह 3 साल के लिए इसका सदस्य बन जाएगा।
सदस्यता के लिए देने होंगे करोड़ों रुपये?
इस बोर्ड की सदस्यता को लेकर एक बड़ी शर्त भी सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती तीन साल के लिए किसी देश को कोई पैसा नहीं देना होगा। लेकिन, अगर कोई देश तीन साल बाद भी सदस्य बने रहना चाहता है, तो उसे भारी रकम चुकानी होगी। स्थायी सदस्यता के लिए संबंधित देश को 1 अरब डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपये) का योगदान देना होगा। इस पैसे का इस्तेमाल बोर्ड के कामकाज में किया जाएगा।
गाजा के लिए क्या है प्लान?
एपी (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, यह बोर्ड गाजा में सीजफायर समझौते के ‘दूसरे चरण’ को लागू करेगा। इसके तहत बोर्ड के सदस्य देश वहां की गतिविधियों पर नजर रखेंगे। मुख्य योजनाएं इस प्रकार हैं:
- गाजा में एक नई फिलिस्तीनी समिति बनाई जाएगी।
- शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल तैनात होगा।
- हमास का पूरी तरह से निरस्त्रीकरण (Disarmament) किया जाएगा।
- गाजा का फिर से निर्माण और लोगों को बसाने का काम होगा।
अजय बंगा को भी मिली जगह
इस बोर्ड में भारतीय मूल के अजय बंगा को भी अहम जगह मिली है। बंगा अभी वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष हैं। वह उन तकनीकी विशेषज्ञों की टीम में शामिल होंगे जो ट्रंप के 20 सूत्रीय रोडमैप पर काम करेंगे। अमेरिकी राजदूत ने सोशल मीडिया पर खुशी जताते हुए कहा कि यह बोर्ड स्थिरता और समृद्धि के लिए काम करेगा।

