Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी (IGMC) में मुफ्त इलाज की आस लगाए मरीजों के लिए चिंताजनक खबर है। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी स्वास्थ्य योजनाओं—आयुष्मान भारत और हिमकेयर—का बकाया भुगतान 110 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। आंकड़ों के अनुसार, आयुष्मान भारत के तहत करीब 40 करोड़ और हिमकेयर योजना के तहत लगभग 70 करोड़ रुपये की पेंडेंसी हो चुकी है। फरवरी में सरकार ने ऊंट के मुंह में जीरा के समान महज 3-3 करोड़ रुपये जारी किए, जिससे अस्पताल की वित्तीय स्थिति डगमगा रही है।
चमियाणा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का भी बुरा हाल
शिमला के ही चमियाणा स्थित सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थिति भी अलग नहीं है। पिछले एक साल से यहां नौ विभागों में सेवाएं दी जा रही हैं, लेकिन अब यहां भी 7 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। सरकार ने पिछले महीने एक करोड़ रुपये दिए थे, मगर पेंडेंसी कम होने का नाम नहीं ले रही है। आलम यह है कि कार्डियोलॉजी जैसे गंभीर विभागों में ऑपरेशन के जरूरी उपकरण अब सरकारी कार्ड पर मिलना मुश्किल हो रहे हैं।
गरीब मरीजों के लिए ‘संजीवनी’ पर खतरा
आईजीएमसी में हर दिन प्रदेश के कोने-कोने से सैकड़ों ऐसे परिवार पहुंचते हैं, जिनका सहारा सिर्फ ये सरकारी योजनाएं हैं। सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देने वाली ये योजनाएं गंभीर बीमारियों में वरदान साबित होती हैं। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि वे किसी भी मरीज का इलाज नहीं रोक रहे हैं। सवाल यह उठता है कि करोड़ों की उधारी के बीच अस्पताल दवाइयों और उपकरणों की कमी से कब तक जूझ पाएगा।
हृदय रोगियों की बढ़ सकती है परेशानी
चमियाणा अस्पताल में सीटीवीएस और कार्डियोलॉजी विभाग में कुछ विशेष उपकरणों की उपलब्धता को लेकर पेंच फंस गया है। सरकारी योजनाओं का भुगतान न होने के कारण सप्लायर अब सामान देने में हिचकिचा रहे हैं। हालांकि प्रबंधन का कहना है कि बाकी सात विभागों में सेवाएं सामान्य रूप से चल रही हैं। यदि जल्द ही फंड जारी नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में हार्ट सर्जरी जैसे महंगे इलाज के लिए गरीब मरीजों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ सकती है।
सरकार की किस्तों से नहीं बनेगी बात
अस्पताल प्रशासन को उम्मीद है कि बजट सत्र के बाद फंड की स्थिति सुधरेगी। फिलहाल सरकार द्वारा जारी की जा रही छोटी किस्तों से पुराने बिलों का भुगतान करना संभव नहीं है। आईजीएमसी प्रशासन लगातार विभाग और सरकार के संपर्क में है ताकि स्वास्थ्य सेवाओं पर पूर्ण विराम न लगे। अब देखना यह होगा कि सरकार इस भारी भरकम पेंडेंसी को चुकाने के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।


