Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र और पड़ोसी राज्य पंजाब पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने साफ कर दिया है कि अगर राज्य को बिजली परियोजनाओं से 50 फीसदी रॉयल्टी मिले, तो उन्हें केंद्र से किसी राजस्व घाटा अनुदान (RDG) की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब के वित्त मंत्री के दावों को झूठा करार देते हुए कहा कि पंजाब का दिवालिया निकल चुका है, जबकि हिमाचल की अर्थव्यवस्था मजबूत है। सुक्खू ने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया है कि किसी भी कर्मचारी का वेतन या पेंशन नहीं काटी जाएगी।
जल, जंगल और जमीन पर हमारा हक, केंद्र दे पूरी रॉयल्टी
मुख्यमंत्री सुक्खू ने राज्य सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अपनी बात बेबाकी से रखी। उन्होंने कहा कि एसजेवीएनएल, एनटीपीसी और एनएचपीसी जैसे केंद्रीय उपक्रम राज्य को केवल 12 फीसदी रॉयल्टी दे रहे हैं। यह राज्य के साथ सरासर अन्याय है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जल, जंगल और जमीन हिमाचल के संसाधन हैं। इन संसाधनों के दोहन की पूरी भरपाई होनी चाहिए। अगर राज्य को अपने फ्री हो चुके पावर प्रोजेक्ट्स से 50 फीसदी रॉयल्टी मिलती है, तो उसे केंद्र के सामने हाथ फैलाने की कोई जरूरत नहीं होगी।
पंजाब सरकार पर तीखा तंज, ‘आपका तो दिवालिया निकल चुका है’
पड़ोसी राज्य पंजाब के वित्त मंत्री ने विधानसभा में हिमाचल को लेकर कुछ दावे किए थे। सुक्खू ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल ने पंजाब की गाड़ियों पर कोई टैक्स नहीं लगाया है। सुक्खू ने कड़े शब्दों में कहा कि पंजाब सरकार ने अपने कर्मचारियों को पुरानी पेंशन देने का झूठा वादा किया था। अब चुनाव से पहले पंजाब सरकार जनता को लॉलीपॉप थमा रही है। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि हमने अपनी अर्थव्यवस्था को संभाल लिया है, लेकिन पंजाब पूरी तरह से दिवालिया हो चुका है।
वेतन और पेंशन पर कोई कैंची नहीं, योजनाएं रहेंगी जारी
प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों की चिंताओं को दूर करते हुए मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने साफ कहा कि सरकार ने किसी भी कर्मचारी के वेतन या पेंशन में कोई कटौती नहीं की है। राज्य में चल रही सभी सामाजिक कल्याण योजनाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी। सरकार राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। आने वाले बजट में इस आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए जाएंगे।
जंगल काटने की छूट मिले, तो नहीं चाहिए कोई ग्रांट
हिमाचल प्रदेश पर्यावरण संरक्षण में पूरे देश की मदद कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अपनी पारिस्थितिकी के जरिए हर साल देश को 90 हजार करोड़ रुपये की सेवाएं देता है। इसमें हमारे घने जंगलों का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अगर केंद्र हमें जंगल काटने की छूट दे दे, तो हमें आरडीजी की कोई आवश्यकता ही नहीं रहेगी। संविधान की धारा 275 (1) के तहत आरडीजी राज्य का संवैधानिक अधिकार है, क्योंकि हमारे संसाधनों का इस्तेमाल पूरा देश कर रहा है।
विजिलेंस और रसोई गैस पर भी स्पष्ट की स्थिति
मुख्यमंत्री ने विजिलेंस को सूचना के अधिकार (RTI) से बाहर रखने के फैसले को सही ठहराया। उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी तरह से कानूनी दायरे में लिया गया है। सीबीआई और ईडी भी इसी कानून के तहत काम करते हैं। इसके अलावा, राज्य में एलपीजी की कमी पर भी उन्होंने स्थिति स्पष्ट की। सुक्खू ने माना कि राज्य में गैस की थोड़ी कमी जरूर है, लेकिन इससे निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्य सचिव जल्द ही व्यावसायिक इकाइयों के लिए गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखेंगे।

