Chandigarh News: चंडीगढ़ में तेंदुए की खाल तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई करेगी। पिछले साल डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने दो तस्करों को गिरफ्तार किया था। उनसे तेंदुए की खाल बरामद हुई थी।
यह घटना सेक्टर-22 स्थित सूद धर्मशाला में घटी। डीआरआई को मुंबई कस्टम से इस तस्करी की सूचना मिली थी। इसके बाद एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया। जांचकर्ताओं ने ग्राहक बनकर तस्करों से संपर्क किया।
तस्करों ने धर्मशाला में डेरा जमा रखा था। ऑपरेशन के दौरान विक्रम सिंह बघेल और अवधेश चौधरी नाम के दो आरोपितों को पकड़ा गया। दोनों आरोपित राजस्थान के रहने वाले हैं। उनके पास से तेंदुए की खाल जब्त की गई।
सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर
चंडीगढ़वन विभाग ने गहन जांच की मांग की। इसके बाद मामला सीबीआई को सौंप दिया गया। दिल्ली सीबीआई ने आरोपितों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। यह एफआईआर वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की कई धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
इसमें धारा 9, 39, 40, 48, 49बी, 50, 51 और 57 शामिल हैं। यह मामला चंडीगढ़ से जुड़ा है। इसलिए चार्जशीट भी चंडीगढ़ की सीबीआई विशेष अदालत में दाखिल होगी। सीबीआई अब पूरे नेटवर्क का पता लगाएगी।
हिमाचल से आती थी खाल
जांच मेंपता चला कि तेंदुए की खाल हिमाचल प्रदेश से लाई जाती थी। आरोपित इन खालों को देश के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई करते थे। इस अवैध व्यापार से उन्हें मोटी कमाई होती थी। दोनों लंबे समय से इस कारोबार में शामिल थे।
सीबीआई यह पता लगाएगी कि यह अंतरराज्यीय नेटवर्क कितना बड़ा है। इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं। खाल हिमाचल के किन विशेष इलाकों से लाई जाती थी। इन्हें किन बाजारों में भेजा जाना था।
डीआरआई का ऑपरेशन
सितंबर 2025 मेंडीआरआई को इस तस्करी की जानकारी मिली। मुंबई कस्टम विभाग ने भी इसकी सूचना दी। चंडीगढ़ यूनिट ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। एक बड़ा ऑपरेशन चलाया गया। तस्करों पर नजर रखी गई।
जांच टीम ने ग्राहक का रोल अदा किया। उनसे खाल खरीदने की बातचीत की। जब सौदा पक्का हुआ तो छापा मारा गया। इस ऑपरेशन में दोनों आरोपितों को रंगे हाथों पकड़ लिया गया। उनसे तेंदुए की खाल बरामद हुई।
तेंदुए को मिलता है सर्वोच्च संरक्षण
तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 कीअनुसूची-1 में आता है। इस श्रेणी में सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त जानवर शामिल हैं। इन जानवरों को पकड़ना, मारना या उनके अंगों का व्यापार करना गंभीर अपराध है।
इस अपराध के लिए कानून में कठोर सजा का प्रावधान है। फिर भी तस्करों का एक नेटवर्क सक्रिय रहता है। वे संरक्षित प्रजातियों के अंगों की अवैध तस्करी करते हैं। यह मामला इसी नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
सीबीआई की जांच के मुख्य बिंदु
सीबीआई अब पूरेमामले की गहराई से जांच करेगी। एजेंसी यह पता लगाएगी कि तस्करी नेटवर्क कितना विस्तृत है। खाल कटाई और परिवहन की पूरी श्रृंखला का पर्दाफाश होगा। खरीदारों की पहचान भी जांच का हिस्सा होगी।
आरोपित लंबे समय से इस धंधे में थे। संभव है कि उनके पास पुराने मामलों का रिकॉर्ड भी हो। सीबीआई इन सभी पहलुओं पर गौर करेगी। वन विभाग के साथ समन्वय कर जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
इस मामले ने वन्यजीव तस्करी के खतरनाक नेटवर्क को उजागर किया है। सीबीआई की जांच से बड़े खिलाड़ियों तक पहुंचने की उम्मीद है। यह मामला देश भर में वन्यजीव अपराधों पर नजर रखने वाली एजेंसियों के लिए अहम है।

