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पत्नी ने दी पति की चिता को मुखाग्नि, बेटा विदेश में होने पर निभाई अंतिम संस्कार की रस्में

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महिला अंतिम संस्कार नहीं कर सकती। यहां तक कि उसे श्मशानघाट तक जाने की अनुमति नहीं होती। भारतीय परंपरा के अनुसार किसी की मौत होने पर उसे मुखाग्नि मृतक का बेटा, भाई, भतीजा, पति या फिर पिता देता है। लेकिन पुत्र के अभाव में बेटियों ने पिता को मुखाग्नि दी है, तो कहीं पत्नी ने भी इस परंपरा को निभाया। कुछ ऐसा ही वाक्या सुजानपुर में उस वक्त पेश आया जब लगभग 65 साल की एक महिला ने अपने 75 वर्षीय पति को मुखाग्नि देकर न केवल अंतिम यात्रा तक पति का साथ निभाया, बल्कि रूढ़ीवाद की जंजीरों को भी तोड़ डाला। बताते हैं कि मृतक का बेटा विदेश में नौकरी करता है, जिसके चलते वह अपने पिता के अंतिम संस्कार के समय पहुंच नहीं पाया और बेटियों की शादी हो चुकी है।

वाकया सुजानपुर शहर के वार्ड नंबर नौ के 75 वर्षीय नारायण गुप्ता की मौत का है। कई दिनों से बीमार चल रहे नारायण गुप्ता का मंगलवार दोपहर के समय निधन हो गया। जब उनका निधन हुआ तो घर पर उनकी पत्नी, बेटियां और दमाद मौजूद थे, लेकिन उनका इकलौता बेटा दीपक जो दुबई में कार्य करता है घर पर नहीं था। वैश्विक महामारी कोरोना के चलते उसका समय रहते घर पर आना मुश्किल था। ऐसे में मृतक को मुखाग्नि कौन दे यह सवाल सबके सामने आया। इसी दौरान मृतक की पत्नी कमला गुप्ता आगे आईं और कहा कि वे अपने पति को मुखाग्नि देकर बेटे के साथ-साथ पतिव्रता धर्म को भी निभाएगी।

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