New Delhi News: क्या आपने कभी सोचा है कि इस्लाम धर्म में लोग बैठकर पेशाब क्यों करते हैं? यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है। इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं और विज्ञान दोनों हैं। बहुत से लोग इस बारे में सही जानकारी नहीं रखते। इस्लाम में सफाई का बहुत महत्व है। साथ ही डॉक्टर्स भी इसे सेहत के लिए फायदेमंद मानते हैं।
इस्लाम और पवित्रता का नियम
इस्लाम में स्वच्छता को बहुत ऊंचा दर्जा दिया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पेशाब को अशुद्ध माना जाता है। अगर पेशाब की एक बूंद भी कपड़े पर गिर जाए, तो कपड़ा नापाक हो जाता है। ऐसे कपड़ों में कोई भी व्यक्ति नमाज नहीं पढ़ सकता। ना ही वह कुरान शरीफ को हाथ लगा सकता है। खड़े होकर पेशाब करने से कपड़ों पर छींटे पड़ने का डर रहता है। बैठकर पेशाब करने से कपड़े गंदे नहीं होते और पवित्रता बनी रहती है।
पर्दा और शर्मो-हया
इस्लाम में शरीर के निजी अंगों को छिपाना बेहद जरूरी है। इसे ‘सतर’ कहा जाता है। दूसरों के सामने निजी अंगों का दिखना बड़ा गुनाह माना जाता है। खड़े होकर पेशाब करने में पर्दा रहने की गुंजाइश कम होती है। वहीं, बैठकर फारिग होने पर इंसान का शरीर काफी हद तक ढका रहता है। यह शर्मो-हया और मर्यादा के लिहाज से बेहतर तरीका माना गया है। इसलिए मुस्लिम लोग बैठकर ही पेशाब करना पसंद करते हैं।
मेडिकल साइंस क्या कहता है?
यह आदत केवल इस्लाम या धर्म तक सीमित नहीं है। मेडिकल साइंस भी इसका पूरी तरह समर्थन करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, खड़े होकर पेशाब करना शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकता है। डॉक्टर्स का कहना है कि खड़े रहने पर मूत्राशय (Bladder) पूरी तरह खाली नहीं हो पाता। गंदा पानी अंदर ही रह जाता है। यह पेशाब वापस किडनी की तरफ जा सकता है। इससे यूरिन इन्फेक्शन और किडनी की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। बैठकर पेशाब करने से पेट पर दबाव पड़ता है और पेट अच्छे से साफ होता है।

