विक्रमसिंघे ने क्यों पीएम मोदी को कहा धन्यवाद, जाने सब कुछ

RIGHT NEWS INDIA: आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका को बड़ी आर्थिक मदद की जरूरत है. बड़ी सियासी उठापटक के बाद महिंदा राजपक्षे ने देश को गर्त में छोड़कर प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया.

अब देश को उबारने का सारा दारोमदार नए प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे पर है. ऐसी स्थिति में रानिल विक्रसिंघे ने भारत को याद किया है. इस बाबत उन्होंने श्रीलंका में भारतीय राजदूत गोपाल बागले से मुलाकात भी की है.

विक्रमसिंघे ने पीएम मोदी को कहा धन्यवाद

नवनियुक्त प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने शुक्रवार को कोलंबो में प्रधानमंत्री कार्यालय में अपने पहले दिन श्रीलंका में भारतीय राजदूत गोपाल बागले से मुलाकात की. विक्रमसिंघे ने आर्थिक संकट की स्थिति में श्रीलंका को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया.

बागले और विक्रमसिंघे के बीच चर्चा

विक्रमसिंघे ने गुरुवार को कोलंबो में शपथ ग्रहण के बाद मंदिर की यात्रा के दौरान कहा था, ‘भारत के साथ संबंध काफी बेहतर होंगे, मैं श्रीलंका की मदद करने के लिए भारत और प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देना चाहता हूं.’ नए प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को श्रीलंका में भारतीय राजदूत से मुलाकात की. बागले और विक्रमसिंघे ने दोनों देशों के बीच लोकतांत्रिक संबंधों के साथ-साथ सहयोग पर चर्चा की.

भारतीय दूतावास ने ट्वीट किया

श्रीलंका में भारतीय दूतावास ने ट्वीट किया, ‘उच्चायुक्त ने माननीय पीएम रानिल विक्रमसिंघे से मुलाकात की. बधाई और शुभकामनाएं दीं. श्रीलंका में सभी लोगों की भलाई के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से आर्थिक सुधार और स्थिरता के लिए निरंतर सहयोग पर चर्चा हुई.’

देश की अर्थव्यवस्था के लिए ली चुनौती

श्रीलंका की यूनाइटेड नेशनल पार्टी (यूएनपी) के नेता विक्रमसिंघे ने राजनीतिक गतिरोध और अभूतपूर्व आर्थिक संकट के बीच देश में स्थिरता बहाल करने के लिए गुरुवार को रिकॉर्ड छठे कार्यकाल के लिए देश के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक विक्रमसिंघे ने कहा कि उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था के उत्थान के लिए एक चुनौती ली है.

सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा श्रीलंका

उन्होंने कहा, ‘मैंने देश के आर्थिक उत्थान के लिए एक चुनौती ली है और मुझे इसे पूरा करना ही होगा. भोजन और ईंधन की कमी, बढ़ती कीमतों और बिजली कटौती के कारण श्रीलंका आजादी के बाद से अपने सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, जिससे बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं. जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. भारत श्रीलंका का एक मजबूत और पारस्परिक रूप से लाभप्रद भागीदार बनता जा रहा है.’

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