Tech News: आजकल बाजार में फोल्डेबल स्मार्टफोन का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। ये देखने में जितने शानदार लगते हैं, इनकी कीमत भी उतनी ही ज्यादा होती है। अक्सर लोग सोचते हैं कि आखिर एक मुड़ने वाले स्मार्टफोन के लिए लाखों रुपये क्यों चुकाने पड़ते हैं? इसके पीछे सिर्फ ब्रांड का नाम नहीं, बल्कि कई तकनीकी कारण छिपे हैं। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर ये गैजेट्स इतने महंगे क्यों बिकते हैं।
अनोखी डिस्प्ले टेक्नोलॉजी है असली वजह
इनकी कीमत ज्यादा होने का सबसे बड़ा कारण इनकी स्क्रीन है। फोल्डेबल स्मार्टफोन में साधारण कांच का इस्तेमाल नहीं होता है। इसमें अल्ट्रा-थिन फ्लेक्सिबल मटेरियल वाली स्क्रीन लगती है। ऐसी डिस्प्ले को बनाना बहुत मुश्किल और महंगा होता है। स्क्रीन बार-बार मुड़ने पर भी टूटे नहीं, इसके लिए उस पर कई खास कोटिंग और लेयर्स चढ़ाई जाती हैं। इससे लागत काफी बढ़ जाती है।
हिंज सिस्टम पर होती है भारी इंजीनियरिंग
फोन को खोलने और बंद करने के लिए जो हिंज (कब्जा) लगाया जाता है, वह बहुत जटिल होता है। यह हिंज हजारों बार खुलने-बंद होने के बाद भी खराब न हो, इसके लिए कंपनियां खास टेस्टिंग करती हैं। इस मैकेनिज्म को एकदम स्मूथ बनाने में बहुत ज्यादा समय और पैसा लगता है। यह खर्च भी स्मार्टफोन की फाइनल कीमत में जुड़ जाता है।
रिसर्च और डेवलपमेंट का खर्च
फोल्डेबल तकनीक अभी भी दुनिया के लिए नई है। कंपनियां फोन के डिजाइन और टिकाऊपन को बेहतर बनाने के लिए सालों तक रिसर्च करती हैं। इस रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर कंपनियों का मोटा पैसा खर्च होता है। साधारण स्मार्टफोन की तुलना में फोल्डेबल फोन को तैयार करने में ज्यादा दिमाग और संसाधन लगते हैं।
कम उत्पादन और प्रीमियम क्वालिटी
आम स्मार्टफोन की तुलना में फोल्डेबल फोन कम संख्या में बनाए जाते हैं। जब उत्पादन कम होता है, तो प्रति यूनिट लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा, इनमें इस्तेमाल होने वाला सामान बहुत प्रीमियम होता है। फोन को मजबूती देने के लिए हाई क्वालिटी एल्यूमिनियम फ्रेम और खास ग्लास का उपयोग किया जाता है। फिलहाल बाजार में इसके विकल्प कम हैं, इसलिए कंपनियां इसे प्रीमियम प्रोडक्ट के तौर पर बेचती हैं। हालांकि, तकनीक पुरानी होने पर भविष्य में इनके सस्ते होने की उम्मीद है।
