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WHO का नया मास्टरप्लान: क्या सिगरेट-शराब पीना अब और भी महंगा होगा? जानें सेहत का यह ‘टैक्स फॉर्मूला’

World Health News: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने विकासशील देशों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ा सुझाव दिया है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, तंबाकू, शराब और मीठे पेय पदार्थों पर टैक्स बढ़ाकर देश अपनी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर सकते हैं। अक्सर गरीब और विकासशील देश इलाज और दवाइयों के लिए विदेशी मदद पर निर्भर रहते हैं। विदेशी फंड कम होते ही वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा जाती है। इस निर्भरता को खत्म करने के लिए ‘हेल्थ टैक्स’ को एक असरदार हथियार माना जा रहा है।

क्या है WHO का मुख्य फोकस?

डब्ल्यूएचओ दो प्रमुख स्तरों पर काम कर रहा है। पहला लक्ष्य यह है कि लोगों को टीकाकरण और दवाइयां जैसी जरूरी सेवाएं बिना रुके मिलती रहें। दूसरा, सरकारों को अपने ही देश के संसाधनों से पैसा जुटाना सिखाना है। मजबूत हेल्थ सिस्टम वही है जो विदेशी मदद के बजाय अपने पैरों पर खड़ा हो। संगठन का मानना है कि सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली चीजों पर टैक्स लगाकर सरकारें स्वास्थ्य बजट की कमी को पूरा कर सकती हैं।

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हेल्थ टैक्स के दोतरफा फायदे

हेल्थ टैक्स का मतलब सिर्फ खजाना भरना नहीं है। इसके दो बड़े लाभ होते हैं। जब हानिकारक चीजें महंगी होती हैं, तो लोग उनका इस्तेमाल कम कर देते हैं। इससे कैंसर, दिल की बीमारी और डायबिटीज जैसे रोगों का खतरा घटता है। दूसरा फायदा यह है कि इस टैक्स से मिलने वाले अतिरिक्त पैसे को अस्पतालों और सस्ती दवाइयों पर खर्च किया जा सकता है। यानी यह कदम बीमारी कम करने और इलाज बेहतर करने, दोनों में मदद करता है।

फिलीपींस की सफलता से सीखे दुनिया

हेल्थ टैक्स की ताकत को फिलीपींस ने साबित कर दिखाया है। साल 2017 में वहां तंबाकू और शराब पर टैक्स बढ़ाया गया। इसके बाद सरकार की कमाई पांच गुना से भी ज्यादा बढ़ गई। फिलीपींस ने इस पैसे का इस्तेमाल नेशनल हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम को बेहतर बनाने में किया। इससे करीब 1.5 करोड़ गरीब परिवारों को फ्री स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिला। यह उदाहरण दिखाता है कि सही आर्थिक नीति से सामाजिक सुरक्षा को कैसे मजबूत किया जा सकता है।

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सरकारों के लिए क्यों जरूरी है यह कदम?

आने वाले समय में हेल्थ टैक्स देशों को आर्थिक रूप से सशक्त बना सकता है। इससे अस्पतालों पर मरीजों का बोझ कम होगा क्योंकि लोग अपनी बुरी आदतों को छोड़ेंगे। डॉक्टरों और संसाधनों का सही इस्तेमाल संभव हो पाएगा। डब्ल्यूएचओ का साफ संदेश है कि अगर देशों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना है, तो उन्हें अपने संसाधनों पर भरोसा करना होगा। हेल्थ टैक्स एक ऐसी नीति है जो लंबे समय में जनता और सरकार दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगी।

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