कौन है ताजमहल पर दावा करने वाली राजकुमारी दीया कुमारी

RIGHT NEWS INDIA: यूं तो दुनिया के सातवें अजूबे और मोहब्बत के प्रतीक समझे जाने वाले ‘ताजमहल’ (Taj Mahal Controversy) को लेकर सदियों से कोई न कोई विवाद खड़ा होता ही रहा है. बावजूद इसके न तो ताजमहल का कोई कुछ बिगाड़ पाया और न ही ताजमहल (Taj Mahal) पर किसी और के दावे की मुहर लग सकी. ताजमहल के बारे में अगर आज भी मजबूत किवदंती मौजूद है तो वह यह है कि वह आगरा में यमुना के दक्षिणी तट पर स्थापित है, जो संगमरमर का मकबरा है. कहा तो जाता है कि इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां (Shah Jahan) ने बेगम मुमताज महल (Begum Mumtaz Mahal) की याद में 1632 में कराया था.

ताजमहल जो अपनी खूबसूरती, प्यार की निशानी के लिए दुनिया भर में मशहूर है. वहीं दूसरी ओर इसका विवादों से भी नाता सैकड़ों साल से निर्वाध बना हुआ है. फिलहाल मोहब्बत की यादगार निशानी समझा जाने वाला सफेद संगमरमरी ताजमहल को लेकर अब फिर चर्चाएं शुरू हो गई हैं. ताजमहल उतना चर्चित नहीं है, इन चर्चाओं की मौजूदगी में जितनी कि चर्चाओं को जन्म देने वाली खूबसूरत राजकुमारी का चर्चा चंद दिन से दुनिया में हो रहा है. ऐसे में उस राजकुमारी के बारे मेंजानना जरूरी है, जो ताजमहल की वजह से ही सही मगर इन दिनों ताजमहल के इतिहास से भी ज्यादा चर्चित हो गईं हैं.

ताज महल से ज्यादा चर्चित दीया कुमारी

उस राजकुमारी का नाम है दीया कुमारी (BJP MP Diya Kumari). वही राजकुमारी दीया जिनका ताल्लुक जयपुर राजघराने से है. राजकुमारी दीया कुमारी ने जबसे दावा ठोंका है कि ताजमहल तो उनके (राजकुमारी दीया कुमारी) पुरखों का ‘महल’ है. तब से हिंदुस्तान सहित दुनिया भर में कोहराम मचा है. जितने मुंह उससे ज्यादा बातें और चर्चाएं हैं. ताजमहल से ज्यादा चर्चाएं तो राजकुमारी दीया कुमारी और उनके दावे को लेकर हैं. ऐसा नहीं है कि दीया सिंह ताजमहल को अपने पुरखों का महल यूं ही हवा में बता रही हैं. खुद की दावेदारी की पुख्ताई में वे ताजमहल से जुड़े तमाम दस्तावेज अपने कब्जे में होने का दावा करती हैं.

ताजमहल पर दीया कुमारी का दावा

वे दस्तावेज, जो साबित कर सकते हैं कि आखिर कैसे ताजमहल मुगल सम्राट शाहजहां का न होकर दीया कुमारी के पुरखों का महल कभी हुआ करता था? ताजमहल शाहजहां का है या फिर जयपुर राजघराने की राजकुमारी दीया कुमारी के पुरखों का? यह जब तय होगा तब बाद में तय होता रहेगा. हाल फिलहाल तो यह एक बहस और घर बैठे-बिठाए वाद-विवाद का कारण ही नजर आता है. इसका मतलब यह कतई नहीं है दीया कुमारी की दावेदारी को यूं ही ‘हवा’ में उछाल दिया जाए. क्योंकि दीया कुमारी के ताजमहल से जुड़े अपने पुरखों से हासिल दस्तावेजों को लेकर यह मामला बाकायदा इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच पहुंच चुका है. आज के जमाने में कोई भी इंसान (विशेष रूप से हिंदुस्तान में) यूं ही बे-वजह कोर्ट-कचहरी को धक्के खाने को उतावला नहीं होगा.

हाईकोर्ट जाने वाले रजनीश सिंह

अगर उसके पास कुछ मजबूत दस्तावेज नहीं होंगे. आज अपने इस “एक्सप्लेनर” के जरिए यहां दीया कुमारी और ताजमहल को लेकर उठे विवाद का विस्तृत में जिक्र इसलिए कर रहा है. क्योंकि आज ही यानी (12 मई 2022) को इस मुद्दे पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई भी पहले से ही निर्धारित है. दरअसल भाजपा नेता डॉक्टर रजनीश सिंह ने इस बावत कोर्ट में एक याचिका दाखिल की हुई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में याची ने कहा है कि ताजमहल के 22 कमरे लंबे वक्त से तालाबंद हैं. याची ने इन्हीं 22 कमरों को खुलवा कर उनका निरीक्षण कराने का आग्रह कोर्ट में दाखिल याचिका के जरिए किया है. याचिकाकर्ता ने यह सर्वेक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से कराने की गुजारिश की है.

तब दीया के पुरखों ने मुंह नहीं खोला….

क्योंकि इस तरह की किसी भी पुरानी एतिहासिक इमारत के मामले में हिंदुस्तानी अदालतें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग जैसी संस्था पर ही ज्यादा विश्वास जताती रही हैं. ताजमहल के इन बंद कमरों को खुलवाकर इलाहाबाद हाईकोर्ट किसी मुकाम पर पहुंच पाता, उसी बीच राजकुमारी दीया कुमारी ने दावा ठोंक दिया कि, ताजमहल तो उनके पुरखों के मालिकाना ह़क वाली संपत्ति है. जिसे मुगल सम्राट शाहजहां ने हड़प लिया था. दीया कुमारी कहती हैं कि चूंकि तब मुगल हुकूमत थी. लिहाजा इसीलिए उनके पुरखे लाख चाहकर भी अपने महल यानी ताजमहल पर मुगलों के कब्जे का विरोध नहीं कर सके थे. अपने दावे को पुख्ता करने के लिए दीया कुमारी कहती हैं कि उनके ट्रस्ट में स्थित एतिहासिक ‘पोथीखाना’ में ताजमहल से संबंधित जो दस्तावेज मौजूद हैं.

दस्तावेजों में दर्ज है सच्चाई

वे सब उनके दावे को सच साबित करने में सक्षम हैं. जरूरत पड़ने पर दीया कुमारी इन दस्तावेजों को उचित स्थान पर दिखाने को भी राजी हैं. अब आइए एक नजर डालते हैं उन दीया कुमारी और उनके राजघराने के अतीत पर. दरअसल दीया कुमारी के पुरखे या वंशज उन्हीं मानसिंह के राजघराने से ताल्लुक रखते हैं जो, मुगल शासन में अकबर के नवरत्नों में से एक हुआ करते थे. इस राजघराने को पूर्व में आमेर और फिर उसके बाद जयपुर राजघराने के रूप में जाना-पहचाना गया. इसी वंश में जन्मे थे महाराजा सवाई भवानी सिंह (अब पूर्व महाराजा). जिनकी महारानी का नाम पद्मिनी देवी था. यहां बताना जरूरी है कि ताजमहल पर अपना दावा ठोंकने से पहले, यही कुल-खानदान अदालतों में श्रीराम को भी अपना वंशज मय सबूतों के बता चुका है.

अगर दीया कुमारी की मानें तो….

दीया कुमारी के मौजूदा परिजनों या दीया कुमारी की ही बात मानें तो उनके पूर्वज जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई भवानी सिंह, भगवान राम के पुत्र कुश के 309वें वंशज थे. हालांकि दीया कुमारी या उनके परिवार के इस दावे की पुष्टि टीवी9 भारतवर्ष नहीं करता है. मगर यह बात चर्चाओं में इतनी रही है

कि, किसी से अब छिपी नहीं रह गई है. बात अगर जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई भवानी सिंह की हो तो वे, 24 जून 1970 से लेकर 28 दिसंबर सन् 1971 तक जयपुर के महाराजा के सिंहासन पर पदासीन रहे थे. राजकुमारी दीया कुमारी जयपुर के इन्हीं पूर्व महाराजा सवाई भवानी सिंह और महारानी पद्मिनी देवी की इकलौती संतान (पुत्री) हैं.

इसलिए दीया सिंह बनी थीं सर्वे-सर्वा

चूंकि राजा सवाई भवानी सिंह और महारानी पद्मिनी देवी के कोई पुत्र नहीं था. लिहाजा ऐसे में दीया कुमारी को ही जयपुर राजघराने का कानून सर्वे-सर्वा (वारिस) घोषित कर दिया गया. हालांकि बाद में यह इस राजघराने के महाराजा की पदवी दीया कुमारी और नरेंद्र सिंह बड़े बेटे पद्मनाभ सिंह को सौंप दी गई. दीया कुमारी की अगर शिक्षा-दीक्षा की बात की जाए तो वे कुछ वक्त दिल्ली (मॉडर्न स्कूल) और जयपुर में भी रहकर पढ़ीं. बाद में उन्हें उच्च शिक्षा के लिए लंदन भेज दिया गया था. राजकुमारी दीया कुमारी जितना अपने दावों को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहती हैं, उसके कहीं ज्यादा उनकी निजी जिंदगी से जुड़ी कहानियां में अक्सर देखने-सुनने में आती रही हैं. जो अब किसी से दबी-छिपी नहीं रही हैं.

बदकिस्मती ने यह सब भी दिखाया

इनमें सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही उनकी शादी और फिर शादी के 21 साल बाद उनका तलाक. अब से कई साल पहले दीया कुमारी और नरेंद्र सिंह की मुलाकात महाराजा सवाई मानसिंह-2 संग्रहालय में हुई थी. बाद में वह परिचय प्यार और फिर शादी में बदल गया. यह बात उन दिनों की है जब नरेंद्र सिंह, स्नातक की पढ़ाई के बाद म्यूजियम में एक प्रशिक्षण के लिए पहुंचे थे. भले ही नरेंद्र सिंह का राजकुमारी दीया कुमारी की तरह कोई फैमली बैकग्राउंड राजघराने से न रहा हो. बात चूंकि दिल और मन मिले की थी. सो दोनो ने परिवार वालों के विरोध के बाद भी, 1997 में अपनी मर्जी से कोर्ट मैरिज कर ली. जयपुर के महाराजा की बेटी या राजकुमारी का इस तरह किसी आम इंसान से विवाह कर लेना, उन दिनों काफी सुर्खियों में रहा था. काफी हो-हल्ला भी मचा था. उस शोर-शराबे का असर नरेंद्र सिंह और राजकुमारी दीया कुमारी के ऊपर नहीं पड़ा.

दादी के कदमों पर बढ़ी पोती

यह अलग बात है कि विवाह के बाद 21 साल तक साथ रहने के बाद दोनो के मन में खटास पैदा हुई. लिहाजा सन् 2018-2019 के करीब, दीया कुमारी और नरेंद्र सिंह ने कानूनन तलाक ले लिया. कालांतर में दीया कुमारी नरेंद्र सिंह दंपत्ति के तीन संतानें हुईं. पद्मनाभ सिंह, लक्ष्यराज सिंह और बेटी गौरवी. महत्वाकांक्षी और वाकपटु दीया कुमारी को लगा कि वे राजनीति में, अपनी किस्मत आजमा कर देखें. यह विचार उनके मन में दादी राजमाता गायत्री देवी के नक्शे-कदम देखकर आया था. लिहाजा वे भाजपा की सवाई माधोपुर विधानसभा सीट से विधायक बन गईं. बाद में उन्होंने केंद्र की राजनीति में जब कदम बढ़ाने की कोशिश की तो, उन्हें वहां भी सफलता हासिल हो गई. लिहाजा साल 2019 में उन्होंने राजसमंद लोकसभा सीट पर बड़ी और यादगार जीत हासिल की। इन दिनों दीया कुमारी भाजपा की राजसमंद से लोकसभा सांसद हैं.

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