क्रूड की कीमतें ज्यादा हुई हो या कम, कंपनियां बढ़ाती रही कीमते, जानिए तेल का असली खेल

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रविवार को सरकारी तेल कंपनियो ने पेट्रोल की खुदरा कीमत में 35 पैसे और डीजल में 16 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि कर स्पष्ट कर दिया है कि इन उत्पादों के दाम में वृद्धि का सिलसिला फिलहाल जारी रहेगा। सरकारी तेल कंपनियों ने एक बार फिर इस वृद्धि के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड यानी कच्चे तेल की कीमतों को वजह बताया है लेकिन सरकार की तरफ से दिए गए आंकड़े ही इस बात की गवाही हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों का घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों से कोई लेनादेना नहीं है।

2020-21 में नीचे आ गई थी कीमत

अगर ऐसा होता तो वर्ष 2020-21 में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें पिछले 17 वर्षों के निचले स्तर पर होतीं। पिछले वर्ष औसतन 44.82 डॉलर प्रति बैरल की दर से कच्चा तेल खरीदा गया था, जो वर्ष 2004-05 के औसत खरीद मूल्य (39.21 डॉलर प्रति बैरल) के बाद सबसे सस्ती दर है।

कम पर खरीदा फ‍िर भी बढ़ाई कीमतें

पिछले वित्त वर्ष के दौरान इन तेल कंपनियों ने वर्ष 2019-20 के 60.47 डॉलर प्रति बैरल के मुकाबले 15.55 डॉलर कम दाम पर क्रूड खरीदा। इसके बावजूद पिछले एक वर्ष के दौरान पेट्रोल करीब 21 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत में लगभग 29 रुपये प्रति लीटर महंगा किया।

लगातार बढ़ी कीमतें

ऐसे में चालू वित्त वर्ष में पहली अप्रैल से 30 जून तक अगर तेल कंपनियों ने पेट्रोल को 8.95 रुपये प्रति लीटर और डीजल क 8.49 रुपये प्रति लीटर महंगा किया है तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं है, क्योंकि इन तीन महीनों में क्रूड लगातार महंगा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि क्रूड की कीमत इस पूरे वर्ष 80 डॉलर से 100 डॉलर के बीच रह सकती है।

100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंचे दाम

बहरहाल, रविवार को पेट्रोल व डीजल की खुदरा कीमतों को बढ़ाए जाने के बाद देश के कुछ और राज्यों में इसकी कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार चली गई है। मध्य प्रदेश के कई इलाकों में डीजल भी 100 रुपये प्रति लीटर को पार कर गया है जबकि सिक्कम एक और राज्य बन गया है जहां पेट्रोल का दाम तीन अंकों के ऊपर गया है। राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में पेट्रोल पहले से ही 100 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा का हो चुका है।

केंद्र व राज्यों के टैक्स की मार

जीएसटी के दायरे में लाने से परहेज

हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) के डाटा के मुताबिक पहली जुलाई को दिल्ली स्थित उसके पेट्रोल पंप पर पेट्रोल की खुदरा कीमत 98.84 रुपये थी जिसमें 32.90 रुपया केंद्रीय टैक्स, 22.82 रुपये राज्य का टैक्स और 3.82 रुपये डीलर का कमीशन था। फिर, केंद्र के खाते में जितना भी टैक्स आता है उसका 45 फीसद भी राज्यों को जाता है। पेट्रोल-डीजल पर टैक्स की कमाई कई राज्यों के राजस्व का बड़ा हिस्सा है। इसलिए भी अधिकतर राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना ही नहीं चाहती हैं।

भारी भरकम टैक्‍स

रही बात राज्यों में अलग अलग कीमत की तो वह पूरी तरह राज्यों की ओर से वसूले जाने वाले वैट टैक्स पर निर्भर करता है। डीजल की 89.23 रुपये की खुदरा कीमत में 31.80 रुपये केंद्र का, 13.05 रुपये राज्य का और 2.60 रुपये डीलर कमीशन था। दिल्ली में पेट्रोल पर वैट की दर 30 फीसद, डीजल पर 16.75 फीसद है। जबकि केंद्र सरकार पेट्रोल पर चार तरह से केंद्रीय उत्पाद शुल्क वसूलती है, 1.40 रुपये प्रति लीटर की बेसिक उत्पाद शुल्क, 11 रुपये का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क, 2.50 रुपये कृषि विकास फंड के तौर पर और 18 रुपये रोड व इंफ्रास्ट्रक्चर अधिभार के तौर पर।

केंद्र व राज्यों के बीच नहीं बन रही सहमति

डीजल पर केंद्र सरकार की तरफ से आयद यह दर क्रमश: 1.80 रुपये, 8 रुपये, 4 रुपये और 18 रुपये प्रति लीटर की है। 27 राज्य ऐसे हैं जहां पेट्रोल पर 25 फीसद से लेकर 36.50 के बीच टैक्स वसूला जा रहा है। डीजल पर 20 राज्य 20-28 फीसद टैक्स लगा रहे हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दो दिन पहले ही कहा था कि पेट्रो उत्पादों पर टैक्स की दर घटाने को लेकर केंद्र व राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।

भारत की तरफ से खरीदा गया

वर्ष – क्रूड का औसत दाम (डॉलर प्रति बैरल)

2004-05—39.21

2005-06—55.72

2006-07—62.46

2007-08—79.25

2008-09—83.57

2009-10—69.76

2010-11—85.09

2011-12—111.89

2012-13—107.97

2013-14—105.52

2014-15—84.16

2015-16—46.17

2016-17—47.56

2017-18—56.43

2018-19—69.88

2019-20—60.47

2020-21—44.82

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