Bihar News: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक बार फिर कयासों का बाजार गर्म है। राज्यसभा जाने के उनके फैसले के बाद अब यह माना जा रहा है कि वे जल्द ही मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं। हालांकि, अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान नीतीश जिस तरह से घोषणाएं कर रहे हैं, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को उलझन में डाल दिया है। वे एक तरफ राज्यसभा के लिए नामांकन कर चुके हैं, तो दूसरी तरफ मंचों से कह रहे हैं कि “हम कहीं नहीं जा रहे हैं”।
राज्यसभा चुनाव में नीतीश की जीत लगभग तय
जेडीयू के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। इसे देखते हुए नीतीश कुमार का राज्यसभा पहुंचना पूरी तरह निश्चित माना जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में उनका भव्य नामांकन एनडीए की एकजुटता को दर्शाता है। नीतीश कुमार ने खुद वीडियो संदेश जारी कर स्पष्ट किया कि वे अपनी मर्जी से दिल्ली जा रहे हैं। एनडीए इतना मजबूत है कि वह आसानी से पांचवीं सीट भी जीत सकता है। इसके बावजूद नीतीश के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए लोग उनके अंतिम फैसले पर संदेह कर रहे हैं।
सम्राट चौधरी क्या होंगे नीतीश के उत्तराधिकारी?
सहरसा में 13 मार्च को ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान नीतीश कुमार ने बड़े संकेत दिए। उन्होंने मंच पर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखा। नीतीश ने जनता से सम्राट का अभिवादन कराया और उनके काम की तारीफ की। राजनीतिक गलियारों में इसे उत्तराधिकारी चुनने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। नीतीश कुमार पहले भी सार्वजनिक रूप से सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाने की बात कह चुके हैं। हालांकि, उनके “कहीं न जाने” वाले बयान ने इस पूरी तस्वीर को धुंधला कर दिया है।
फैसले बदलने का रहा है पुराना इतिहास
नीतीश कुमार अपनी अनिश्चितता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने 2014 में भाजपा का साथ छोड़ा और 2015 में राजद के साथ सरकार बनाई। फिर 2017 में वापस भाजपा के साथ आ गए। यह सिलसिला 2022 और 2024 में भी जारी रहा। 1995 में भी उन्होंने विधायक चुने जाने के बावजूद इस्तीफा दे दिया था और सांसद बने रहना पसंद किया था। 1985 के बाद उन्होंने कभी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा और हमेशा विधान परिषद के रास्ते मुख्यमंत्री बने।
क्या राज्यसभा से इस्तीफा दे देंगे नीतीश?
सियासी हलकों में चर्चा है कि नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य बनने के बाद भी इस्तीफा दे सकते हैं। उनके पास इस फैसले के लिए 6 महीने का समय होगा। उनकी वर्तमान सक्रियता और भविष्य की योजनाओं की घोषणाएं संकेत देती हैं कि वे शायद अभी बिहार की सत्ता से पूरी तरह दूर नहीं होना चाहते। जब तक परिणाम सामने न आ जाए, नीतीश कुमार के अगले कदम के बारे में पक्के तौर पर कुछ भी कहना मुश्किल है।

