International News: ईरान में मची राजनीतिक उथल-पुथल ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। वहां लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शन और हिंसा के कारण अब सत्ता परिवर्तन की अटकलें तेज हो गई हैं। अगर ईरान में सरकार बदलती है, तो इसका सीधा असर भारत पर पड़ना तय है। भारत और ईरान के बीच केवल कूटनीतिक ही नहीं, बल्कि गहरे आर्थिक रिश्ते भी हैं। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल है कि इस बदलाव से भारत को फायदा होगा या भारी नुकसान झेलना पड़ेगा।
कच्चे तेल की सप्लाई पर संकट के बादल
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता देश है। अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत काफी हद तक आयात पर निर्भर है। ईरान लंबे समय से भारत के लिए कच्चे तेल का एक भरोसेमंद और बड़ा स्रोत रहा है। ईरान का तेल न केवल कीमत में किफायती होता है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी भारतीय रिफाइनरियों के लिए अनुकूल मानी जाती है। अगर वहां हालात बिगड़ते हैं, तो भारत को तेल के लिए नए विकल्प तलाशने पड़ सकते हैं। इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
भारतीय किचन तक पहुंचेगी आंच
कच्चे तेल के अलावा भी भारत ईरान से कई जरूरी चीजें मंगवाता है। इसमें सबसे प्रमुख सूखे मेवे हैं। भारतीय बाजारों में ईरानी पिस्ता और खजूर की जबरदस्त मांग रहती है। इनकी खास पहचान और स्वाद के कारण त्योहारों और शादियों के सीजन में इनकी बिक्री खूब होती है। इसके अलावा भारत वहां से कुछ विशेष केमिकल उत्पाद, पेट्रोकेमिकल्स और कांच के बर्तन भी आयात करता है। ईरान में अस्थिरता का मतलब है कि इन सामानों की सप्लाई चेन टूट सकती है, जिससे भारतीय बाजारों में इनके दाम बढ़ सकते हैं।
बासमती चावल और किसानों पर असर
व्यापार केवल एक तरफा नहीं है। भारत भी ईरान को कई जरूरी सामान भेजता है। इसमें सबसे अहम बासमती चावल है। ईरान भारतीय बासमती चावल का एक बहुत बड़ा खरीदार है। इसके अलावा भारत से चाय, चीनी, जीवन रक्षक दवाइयां, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग के सामान भी वहां भेजे जाते हैं। यह निर्यात भारत के कृषि और उद्योग क्षेत्र को सीधा लाभ पहुंचाता है। अगर ईरान में नीतियां बदलती हैं, तो भारतीय किसानों और व्यापारियों को एक बड़ा बाजार खोने का डर सता रहा है।
प्रतिबंधों की मार और भविष्य की राह
ईरान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तेल और प्राकृतिक गैस पर टिकी है। वहां की सरकारी कमाई का बड़ा हिस्सा ऊर्जा निर्यात से ही आता है। हालांकि, अमेरिका और पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों ने ईरान के व्यापार को पहले ही काफी चोट पहुंचाई है। अब अगर सत्ता परिवर्तन होता है और नई सरकार की नीतियां बदलती हैं, तो तेल व्यापार सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। भारत को जहां ऊर्जा सुरक्षा की चिंता होगी, वहीं ईरान को भारत जैसा बड़ा खरीदार खोने से आर्थिक मोर्चे पर गहरा झटका लग सकता है।
