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धर्मशाला में छात्रा की मौत का सच क्या? कॉलेज पहुंची दिल्ली की टीम, पिता ने कोर्ट में खोले राज!

Himachal News: धर्मशाला के राजकीय कॉलेज में छात्रा की संदिग्ध मौत ने पूरे Himachal News में हलचल मचा दी है। रैगिंग और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोपों की सच्चाई जानने के लिए अब दिल्ली से एक विशेष टीम पहुंची है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने कॉलेज में डेरा डाल लिया है। यह 5 सदस्यों की टीम हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। छात्रा के परिवार और अन्य लोगों को उम्मीद है कि इस जांच से मौत का असली सच सामने आएगा।

5 दिग्गजों की टीम खंगालेगी सच

यूजीसी ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। जांच के लिए प्रो. राज कुमार मित्तल की अध्यक्षता में एक हाई-प्रोफाइल टीम बनाई गई है। इसमें प्रो. सुषमा यादव, डॉ. नीरजा गुप्ता और प्रो. पी. प्रकाश बाबू जैसे अनुभवी लोग शामिल हैं। डॉ. सुनीता सिवाच इस पूरे मिशन में समन्वय का काम कर रही हैं। यह टीम अगले तीन दिनों तक कॉलेज में रहकर छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ से पूछताछ करेगी।

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कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

कमेटी ने आते ही कॉलेज परिसर का निरीक्षण शुरू कर दिया है। टीम यह देख रही है कि कॉलेज में छात्राओं की सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं। क्या वहां रैगिंग रोकने के लिए यूजीसी के नियमों का पालन हो रहा था? टीम आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और छात्र सहायता प्रणाली की भी जांच करेगी। यूजीसी ने सख्त निर्देश दिए हैं कि 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपी जाए, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके।

पिता ने कोर्ट में दर्ज कराए बयान

इस केस में एक और बड़ा मोड़ आया है। मृतक छात्रा के पिता ने धर्मशाला कोर्ट में अपने बयान दर्ज कराए हैं। न्यायिक दंडाधिकारी के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत ये बयान लिए गए। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि परिवार ने बिना किसी दबाव के अपनी बात रखी है। पुलिस अधीक्षक कांगड़ा अशोक रतन ने बताया कि आरोपी छात्राओं से भी पूछताछ जारी है।

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8 अस्पतालों का रिकॉर्ड खोलेगा राज

छात्रा की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। पुलिस ने उन 8 अस्पतालों से रिकॉर्ड जब्त कर लिया है, जहां छात्रा का इलाज चला था। इस मेडिकल रिकॉर्ड की जांच विशेषज्ञों की टीम करेगी। इससे पता चलेगा कि आखिर छात्रा की मौत किन परिस्थितियों में हुई। वहीं, जांच कमेटी के देरी से पहुंचने के कारण कॉलेज के स्टाफ को देर शाम तक इंतजार करना पड़ा।

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