क्या है ‘हलाला’ की वो खौफनाक प्रथा जिस पर गुजरात सरकार ने चलाया हथौड़ा? UCC बिल से खत्म होगा सदियों का शोषण

Gujarat News: गुजरात सरकार ने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश कर दिया है। इस बिल के पास होने के बाद विवाह, तलाक और संपत्ति के नियम सभी के लिए एक समान हो जाएंगे। इसके साथ ही इस्लाम धर्म में प्रचलित ‘हलाला’ जैसी विवादित प्रथा पर भी पूरी तरह से रोक लग जाएगी। लंबे समय से इस प्रथा की भारी आलोचना होती रही है। अब यूसीसी के जरिए सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को इस कुप्रथा से आजाद करने का बड़ा कदम उठाया है।

आखिर क्या है निकाह हलाला की यह प्रथा?

हलाला मुस्लिम समाज में एक बेहद विवादित और पुरानी प्रथा है। मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक, अगर कोई पति अपनी पत्नी को तलाक दे देता है। इसके बाद वह दोबारा उसी महिला से शादी करना चाहता है, तो यह इतना आसान नहीं होता। इसके लिए महिला को एक बहुत ही दर्दनाक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसी प्रक्रिया को ‘निकाह हलाला’ कहा जाता है। इसमें तलाकशुदा महिला को मजबूरी में किसी दूसरे गैर मर्द से निकाह करना पड़ता है।

शारीरिक संबंध और फिर से तलाक का दर्द

नए पति के साथ महिला को पति-पत्नी की तरह रहना पड़ता है। इस दौरान दोनों के बीच शारीरिक संबंध बनना भी अनिवार्य शर्त है। इसके बाद जब दूसरा पति उस महिला को तलाक देता है। तभी वह महिला अपने पहले पति से दोबारा निकाह करने के योग्य मानी जाती है। आलोचक इसे महिलाओं की गरिमा और आजादी पर बहुत बड़ा हमला मानते हैं। उनका कहना है कि मजबूरी में किसी तीसरे पुरुष के साथ सोना सीधा-सीधा शोषण है।

इस्लामी विद्वानों और मौलवियों में भारी मतभेद

कई इस्लामी विद्वान इस प्रथा को पूरी तरह से गलत बताते हैं। उनका साफ कहना है कि मौलवियों ने अपने फायदे के लिए हलाला के नियमों को तोड़ा-मरोड़ा है। असल में हलाला के लिए किसी दूसरे पुरुष से एक वैध निकाह होना जरूरी है। सिर्फ तलाक के मकसद से की गई दूसरी शादी को इस्लाम में भी हराम माना गया है। अगर यह सब जबरदस्ती या किसी सौदे के तहत होता है, तो यह कानूनी और धार्मिक दोनों नजरिए से बिल्कुल गलत है।

UCC 2026 लागू होने के बाद क्या बदलेगा?

गुजरात विधानसभा में बुधवार को यूसीसी-2026 बिल पेश किया गया। इस ऐतिहासिक विधेयक में हलाला प्रथा को जड़ से खत्म करने का सख्त प्रावधान है। जब यह बिल पूरी तरह से कानून बन जाएगा, तब राज्य की तस्वीर बदल जाएगी। सभी धर्मों, जातियों और पंथों के लोगों के लिए शादी और तलाक के कानून एक जैसे होंगे। लिव इन रिलेशनशिप और उत्तराधिकार के नियम भी सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होंगे।

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