New Delhi News: भारत और चीन के बीच सीमा पर एक बार फिर तनाव गहरा गया है। इस बार विवाद की वजह शक्सगाम घाटी है। भारत ने साफ कहा है कि इस घाटी में चीन द्वारा किया जा रहा निर्माण पूरी तरह अवैध है। यह निर्माण चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का हिस्सा बताया जा रहा है। चीन का दावा है कि यह इलाका 1963 से उसके अधिकार में है। हकीकत यह है कि यह भारतीय जमीन पाकिस्तान ने अवैध रूप से हथियाई थी और बाद में इसे चीन को तोहफे में दे दिया। विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
दिल्ली से तीन गुना बड़ी है शक्सगाम घाटी
भारतीय विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, शक्सगाम घाटी का क्षेत्रफल 5180 वर्ग किलोमीटर है। इसका आकार भारत की राजधानी नई दिल्ली (1484 वर्ग किलोमीटर) से तीन गुना ज्यादा है। यह घाटी शक्सगाम नदी के किनारे स्थित है और ट्रांस-काराकोरम की दुर्गम पहाड़ियों में छिपी है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि सर फ्रांसिस यंगहसबैंड ने इस घाटी की खोज की थी। उन्होंने इसका नाम ओपरांग रखा था। साल 1937 के आसपास इसका नाम शक्सगाम पड़ा। यह इलाका भौगोलिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है।
आजादी के तुरंत बाद पाकिस्तान ने किया कब्जा
भारत को 1947 में ब्रिटिश शासन से आजादी मिली। इसी दौरान पाकिस्तान का जन्म हुआ। साल 1948 में पाकिस्तान ने कश्मीर को हथियाने की साजिश रची। उसने कबायलियों और आतंकवादियों के जरिए जम्मू-कश्मीर पर हमला कर दिया। उस समय कश्मीर के महाराजा ने भारत के साथ विलय का फैसला किया। भारतीय सेना ने मोर्चा संभाला, लेकिन सेना के पहुंचने से पहले पाकिस्तान ने कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया था। इसमें शक्सगाम घाटी भी शामिल थी। युद्धविराम के बाद भी यह महत्वपूर्ण इलाका पाकिस्तान के कब्जे में ही रह गया।
अपनी जान बचाने को चीन को दिया ‘तोहफा’
साल 1962 में चीन ने एक नया नक्शा जारी किया। इस नक्शे में पाकिस्तान के कई इलाकों को चीन का हिस्सा बताया गया था। इससे पाकिस्तानी सरकार घबरा गई। उन्हें लगा कि चीन उनके इलाकों पर कब्जा कर लेगा। पाकिस्तान ने तुरंत चीन के साथ बातचीत शुरू की। साल 1963 में दोनों देशों के बीच एक समझौता हुआ। पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने इस पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत पाकिस्तान ने शक्सगाम घाटी चीन को गिफ्ट कर दी। इसके बदले में चीन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) पर पाकिस्तान के दावे का समर्थन कर दिया।
कश्मीर विवाद में चीन की एंट्री का मकसद
मार्च 1963 में ‘टाइम’ मैगजीन ने इस समझौते की पोल खोली थी। मैगजीन ने “पाकिस्तान का लाल चीन के साथ समझौता” शीर्षक से एक रिपोर्ट छापी। रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान ने शक्सगाम को बंजर जमीन बताकर पल्ला झाड़ लिया। भारत ने इसका कड़ा विरोध किया था। जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान ने जानबूझकर चीन को कश्मीर विवाद में शामिल किया। उसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि कश्मीर का मुद्दा कभी सुलझ न पाए। पाकिस्तान उस समय पीओके छोड़ने के अंतरराष्ट्रीय दबाव से भी बचना चाहता था, इसलिए उसने चीन का सहारा लिया।
