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वर्चुअल सर्विस सेंटर: डेमलर इंडिया ने व्यावसायिक वाहनों के लिए खोला वर्चुअल रियलिटी सेंटर, जानें खूबियां

सार
DICV के इस वर्चुअल रियलिटी सेंटर में ऑपरेटर 3D चश्मा और नेविगेशन जॉयस्टिक और डिजिटल मॉडल की मदद से वस्तु की उपयोगिता और उपलब्धता के बारे में वर्चुअली मालूम कर सकता है। 

विस्तार
जर्मनी की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी Daimler AG (डेमलर एजी) की भारतीय कमर्शियल व्हीकल्स की सहायक कंपनी Daimler India Commercial Vehicles (DICV) (डेमलर इंडिया कमर्शियल व्हीकल्स) ने एक वर्चुअल रियलिटी सेंटर (VRC) खोला है। इसकी खास बात यह है कि इससे ऑपरेटर वर्चुअली सर्विस और एक्सेस की जांच कर सकेंगे। 

अमूमन ऐसा होता है कि वाहन में कोई तकनीकी समस्या आने पर यह पता ही नहीं चल पाता है कि उनके किस हिस्से में खराबी है। क्योंकि इन वाहनों के कई स्पेयर पार्ट्स को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मंगाया जाता है।

अब वर्चुअल रियलिटी सिस्टम के जरिए आसानी से इसका पता चल जाएगा। DICV के इस वर्चुअल रियलिटी सेंटर में ऑपरेटर 3D चश्मा और नेविगेशन जॉयस्टिक और डिजिटल मॉडल की मदद से वस्तु की उपयोगिता और उपलब्धता के बारे में वर्चुअली मालूम कर सकता है। 

इसका बड़ा फायदा यह होगा कि वाहन की सही लोकेशन पर कम समय में रिपेयरिंग की जा सकेगी। इससे कस्टम टूल, प्रोटोटाइप व्हीकल के सर्विसिंग के लिए बनाए गए सर्विस-बे की कम आवश्यकता पड़ेगी। रिसर्च और डेवलपमेंट और व्हीकल्स की सर्विसिंग में भी आसानी होगी। 


कैसे है फायदेमंद
बिक्री से पहले हर नए वाहन का इस पैमाने पर जांच होना चाहिए कि उसका सर्विस और मेनटेनेंस कितना आसान है। स्टैंडर्ड प्रोसेस वाहन का एक प्रोटोटाइप वर्जन बनाकर विकसित करना है और फिर टेस्ट करना है कि सर्विस टेक्नीशियन उसके डैमेज पार्ट्स का पता लगा कर उसको कैसे रिपेयर कर सकते हैं। इस प्रोसेस में व्हीकल के बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए फिट होने तक दोहराया जाता है।

VRC के जरिए प्रोटोटाइप बनाने से लेकर वर्चुअल मॉडलिंग और टेस्टिंग के जरिए इसे बदल सकते हैं। आर्य का कहना है कि इससे डेवलपमेंट प्रोसेस को स्पीड मिलेगी और हमारे पोर्टफोलियो को बढ़ाने के लिए ज्यादा रिसोर्स की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

तुरंत होता है संवाद
वर्चुअल रियलिटी से दूसरा फायदा यह है कि फिजिकल मॉडल और वर्कस्पेस के बिना, रिमोट क्षेत्रीय इलाकों में भी मदद मिल जाती है। DICV दुनिया भर के डेमलर ट्रक सहयोगियों के साथ डिजिटल मॉडल साझा करने में सक्षम है।

टीम एक दूसरे से दूर होने पर भी रियल टाइम में अपना फीडबैक और सलाह को एक ही मॉडल से साझा कर सकते हैं। VRC में इंडस्ट्री का सबसे अच्छा 3D बारकोड प्रोजेक्टर, पावर वॉल, एडवांस रियल टाइम ट्रैकिंग कैमरे, 3डी हेड मूवमेंट ट्रैकर गॉगल्स और वर्चुअल रियलिटी सॉफ्टवेयर हैं जो नेविगेशनल जॉयस्टिक के जरिए व्हीकल डिजाइन करने में मदद करता है।

कंपनी की उम्मीदें
इस नई सर्विस की शुरुआत पर DICV के मैनेजिंग डायरेक्टर सत्यकाम आर्य ने कहा, “DICV ने भारत के लिए निर्मित ब्रांड Bharat Benz को टेक्निकल फील्ड में पहले ही सबसे ऊंचे पायदान पर पहुंचा दिया है। अब इस वर्चुअल रियलिटी सेंटर से हम इनोवेशन को आगे बढ़ाकर और समस्या को कम करके अपनी स्थिति को और मजबूत करेंगे।” 
 

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