वीरभद्र सिंह की चिता अभी ठंडी भी नहीं हुई के कांग्रेस का अंतर्कलह खुलकर आया सामने

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गोहर, सुभाग सचदेवा- 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा मिशन रिपीट को अंजाम देगी। इसमें कोई दो राय नहीं है। आज की तारीख में भाजपा एक एकजुट अनुशासित व नीतियों पर चलने वाली पार्टी है। जबकि हिमाचल में कांग्रेस में गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है। अभी कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय हरमन अज़ीज़ नेता छः बार के मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह की चिता की लौ अभी ठंडी भी नहीं हुई के कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पुर्व परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद का दावेदारी ठोंक दी है। इसमें भी कोई शक की गुंजाइश नहीं कि प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का अपना अच्छा खासा जनाधार है। प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस पार्टी एक मात्र ऐसी पार्टी है जिसने सबसे ज्यादा लंबें अरसे तक प्रदेश में शासन किया है मगर कांग्रेस में अपनों द्बारा अपनों की टांगे खींचने का सिलसिला जबसे कांग्रेस में शुरू हुआ है प्रदेश में भाजपा का प्रचार प्रसार खूब फल-फूल रहा है।

कांग्रेस से पुर्व केंद्रीय मंत्री मंडी की राजनीति के चाणक्य मानें जाने वाले पं सुख राम व वीरभद्र सिंह के आपसी कलह के चलते हिविकां का गठन हुआ, जिससे प्रोफेसर प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में प्रदेश में भाजपा हिविकां गठबंधन से सरकार बनी। उसके बाद से प्रदेश में कांग्रेस का अंतर्कलह बढ़ता ही रहा कभी वीरभद्र सिंह-जीएस बाली, कभी वीरभद्र सिंह-सुखविंदर सिंह सुक्खू, कभी वीरभद्र सिंह-कोल सिंह ठाकुर की तनातनी के कारण प्रदेश में कांग्रेस को नुक्सान पहुंचता रहा। मगर कांग्रेसी नेताओं का आपसी अंतर्कलह बढ़ता ही रहा। इतना कुछ होने के बावजूद राजा वीरभद्र सिंह का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सका जीएस बाली, कोल सिंह ठाकुर, सुखविंदर सिंह सुक्खू, विप्लव ठाकुर सभी को वीरभद्र सिंह के आगे नतमस्तक होना ही पड़ा। इससे कांग्रेस को नुक्सान उठाना पड़ा मगर भाजपा ने इस बात का भरपूर फायदा उठाया।

भाजपा ने अपना जनाधार बढ़ाया। जय राम ठाकुर प्रदेशाध्यक्ष बने भाजपा अपने बूते पर सरकार बनाई। इस दौरान भी कांग्रेस की धड़ेबाजी खत्म नहीं हुई। वीरभद्र सिंह को केंद्र भेजा गया मगर हिमाचल में कांग्रेस का कोई खवैया था तो वीरभद्र सिंह, विधानसभा चुनाव पुर्व दुबारा वीरभद्र सिंह हिमाचल आए टुकड़ों में बंट चुकी कांग्रेस को एकजुट किया और पुर्ण बहूमत से सरकार बनाई। 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की धड़ेबाजी पुनः सामने आई कुछ मोदी फैक्टर चला। हिमाचल की राजनीति में भारी उलटफेर हुआ कई दिग्गज नेताओं को हार का मुंह देखना पड़ा। सराज से पांच बार के विधायक जयराम ठाकुर के सिर मुख्यमंत्री का ताज सजा। जय राम ठाकुर का रिपोर्टकार्ड कहीं सराहनीय कहीं एवरेज तो कहीं हल्की परफार्मेंस रही कुल मिलाकर जय राम ठाकुर एक सफल मुख्यमंत्री साबित हुए।

अब जबकि 2022 में आगामी विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में कांग्रेस को एक सुत्र, एक छत व एक माला में पिरोने वाला नेता हरमन अज़ीज़ आधुनिक हिमाचल प्रदेश के निर्माता राजा वीरभद्र सिंह का निधन सबको झकझोर गया। कांग्रेस चाहे तो वीरभद्र सिंह की लोकप्रियता व सुहानुभूति भूना कर आगामी विधानसभा चुनावों मे सता परिवर्तन कर सकती हैं। मगर जीएस बाली, कोल सिंह, मुकेश अग्निहोत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सहित दिग्गज नेताओं का कुर्सी मोह सता की भूख व धड़ेबाजी कांग्रेस को डूबाने और भाजपा के मिशन रिपीट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कांग्रेस की धड़ेबाजी समाप्त न हुई तो 2022 के विधानसभा चुनावों में सराजी नेता जय राम ठाकुर के सिर मुख्यमंत्री का ताज सजाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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