Health News: सोशल मीडिया पर एक नया हेल्थ ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। इसे ‘बर्प टेस्ट’ या ‘डकार टेस्ट’ कहा जा रहा है। इस टेस्ट में खाली पेट एक गिलास गर्म पानी पीना होता है। दावा किया जा रहा है कि अगर 60 सेकंड में डकार आ जाए तो शरीर में टॉक्सिन हैं। माना जा रहा है कि इससे आंतों का स्वास्थ्य और मेटाबॉलिज्म पता चलता है। हमने इस दावे की पड़ताल विशेषज्ञ से करवाई।
हमने मेट्रो अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ विशाल खुराना से बात की। डॉक्टर ने इस टेस्ट को पूरी तरह भ्रामक बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्म पानी पीने के बाद डकार आना एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। यह कोई चिकित्सा परीक्षण नहीं है और न ही यह टॉक्सिन का संकेत देता है।
क्या है डकार टेस्ट का सच?
डॉखुराना के अनुसार इस तरह के टेस्ट का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। शरीर में टॉक्सिन का पता लिवर और किडनी के कार्य से लगाया जाता है। ये अंग प्राकृतिक रूप से विषैले पदार्थों को बाहर निकालते हैं। गर्म पानी पीने से डकार आने का कारण अलग है। गर्म पानी अन्नप्रणाली के स्फिंक्टर को शिथिल कर देता है।
इससे निगलने के दौरान गई हवा बाहर आ जाती है। यह एक साधारण भौतिक प्रतिक्रिया है। इसे शरीर में विषाक्त पदार्थों की मौजूदगी से जोड़ना गलत है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई ट्रेंड आते रहते हैं जिनका चिकित्सकीय कोई महत्व नहीं होता। यह उनमें से एक है।
क्या डकार से आंतों का स्वास्थ्य पता चलता है?
विशेषज्ञ बतातेहैं कि डकार आने का समय कई कारकों पर निर्भर करता है। पानी का तापमान, पीने की गति और निगलने के दौरान हवा का जाना मुख्य कारक हैं। इससे आंतों के स्वास्थ्य या पाचन तंत्र की सटीक जानकारी नहीं मिल सकती। आंतों की सही जांच के लिए चिकित्सकीय परीक्षण जरूरी होते हैं।
इनमें एंडोस्कोपी, सांस परीक्षण या मल विश्लेषण शामिल हैं। केवल डकार के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना गलत होगा। गर्म पानी पाचन में मदद कर सकता है लेकिन यह नैदानिक उपकरण नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए चिकित्सक से परामर्श लेना ही उचित है।
डकार न आना क्या सेहतमंद होने का संकेत है?
डॉखुराना ने स्पष्ट किया कि डकार न आना भी स्वास्थ्य का सही संकेतक नहीं है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। पेट में एसिड की कमी या निर्जलीकरण जैसी स्थितियां भी डकार को प्रभावित कर सकती हैं। बार-बार डकार आना भी एक समस्या का संकेत हो सकता है।
यह गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स रोग का लक्षण हो सकता है। पेट फूलने या लगातार डकार आने की स्थिति में चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। ऑनलाइन ट्रेंड के आधार पर स्वास्थ्य का आकलन करना खतरनाक हो सकता है। हमेशा प्रमाणित चिकित्सा जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए।
डकार से जुड़ी कब करें चिंता?
विशेषज्ञ मानतेहैं कि डकार एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। लेकिन कुछ लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है। अगर डकार के साथ पेट में तेज दर्द, सूजन या वजन कम हो रहा हो तो सतर्क हो जाएं। लगातार एसिड रिफ्लक्स या अपच की शिकायत भी गंभीर हो सकती है।
ऐसे में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए। वे उचित जांच जैसे अल्ट्रासाउंड या एंडोस्कोपी की सलाह दे सकते हैं। गर्म पानी पीना सुरक्षित है लेकिन अत्यधिक गर्म पानी से बचना चाहिए। इससे अन्नप्रणाली में जलन हो सकती है। संतुलित तापमान का पानी ही पीना उचित है।
सोशल मीडिया हेल्थ ट्रेंड पर एक्सपर्ट की राय
डॉखुराना ने बताया कि ऐसे ट्रेंड अक्सर वायरल हो जाते हैं। इनमें से अधिकतर का चिकित्सकीय विज्ञान से कोई संबंध नहीं होता। लोगों को ऐसी जानकारी पर संदेह करना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य परीक्षण के लिए प्रमाणित चिकित्सा पद्धति का ही सहारा लेना चाहिए।
सोशल मीडिया पर मिलने वाली सेहत संबंधी सलाह अक्सर अधूरी या गलत होती है। इनसे भ्रम फैलता है और लोग गंभीर समस्याओं को नजरअंदाज कर सकते हैं। सेहत के मामले में हमेशा योग्य चिकित्सक की राय को प्राथमिकता देनी चाहिए। आत्म-निदान से बचना चाहिए।
