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हिमाचल में ‘बाहरी’ अफसरों पर भड़के विक्रमादित्य सिंह, बोले- राजा न बनें, UP-बिहार का भी किया जिक्र

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार और नौकरशाही के बीच तनातनी अब खुलकर सामने आ गई है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने राज्य के बाहर से आए आईएएस और आईपीएस अधिकारियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बाहरी अधिकारी हिमाचल के हितों की अनदेखी कर रहे हैं। विक्रमादित्य ने साफ शब्दों में कहा कि अफसर ‘शासक’ बनने की कोशिश न करें। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से ऐसे अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।

फेसबुक पोस्ट में निकाला गुबार

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि वह डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री के भाषण से पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने यूपी और बिहार का जिक्र करते हुए कहा कि वहां के कुछ आईएएस और आईपीएस अधिकारी हिमाचली मूल्यों को नजरअंदाज कर रहे हैं। मंत्री ने नसीहत दी कि हिमाचल में तैनाती के दौरान उन्हें राज्य की सेवा करनी चाहिए। उन्हें यहां राजा बनकर हुकूमत नहीं चलानी चाहिए।

डिप्टी सीएम ने दी थी चेतावनी

यह मामला एक महीने पहले के एक बयान से जुड़ा है। 6 दिसंबर 2025 को मंडी में सरकार के तीन साल पूरे होने पर एक कार्यक्रम हुआ था। वहां उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने अफसरों को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि जो नौकरशाह सरकार के खिलाफ काम करेंगे, उनसे ‘अंधेरे की रात’ में निपटा जाएगा। विक्रमादित्य सिंह ने अब उसी बयान का समर्थन किया है। उनका कहना है कि इन अधिकारियों में हिमाचल के प्रति कोई सच्ची निष्ठा नहीं है।

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फंड के दुरुपयोग का गंभीर आरोप

मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए विक्रमादित्य सिंह ने केंद्रीय फंड के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र से मिलने वाला पैसा हिमाचल की जनता के लिए है। किसी भी अधिकारी को इसे अपनी मर्जी से बांटने का हक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़कों और अन्य प्रोजेक्ट्स के लिए आए पैसे का कुछ अफसरों ने मनमाना इस्तेमाल किया है। मंत्री ने कहा कि वह केंद्र-राज्य ढांचे का सम्मान करते हैं, लेकिन हिमाचल के हितों से समझौता नहीं करेंगे।

कांग्रेस के अंदर ही उठी विरोध की आवाज

विक्रमादित्य सिंह के इस बयान पर कांग्रेस के अंदर ही मतभेद उभर आए हैं। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस सामान्यीकरण को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि बाहर से आए कई अधिकारी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। ऐसे में सभी पर आरोप लगाने के बजाय नाम लेकर बात करनी चाहिए। वहीं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी इसे गलत बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां देश को बांटने वाली हैं। भारत सबका है और प्रशासनिक बंटवारे सही हैं, लेकिन ऐसे हमले नहीं।

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अफसरों की मनमानी से नेता परेशान

हिमाचल में यह मुद्दा नया नहीं है। कई कांग्रेस नेता दबी जुबान में अफसरों की मनमानी की शिकायत करते रहे हैं। हाल ही में पूर्व मंत्री राम लाल ठाकुर ने खुलासा किया था कि स्वास्थ्य मंत्री धनिराम शांडिल की बातें उनके ही विभाग के सचिव नहीं सुन रहे। एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकार ने कुछ अफसरों को संरक्षण दे रखा है। इससे बाकी अधिकारियों का मनोबल गिर रहा है।

राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल

मंत्रियों और अफसरों के बीच यह विवाद अप्रैल 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले गहराया है। बीजेपी सांसद इंदु गोस्वामी का कार्यकाल खत्म हो रहा है। कांग्रेस के लिए यह चुनाव अहम है। पिछले राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी हार गए थे। उस समय भी ‘बाहरी’ बनाम ‘भीतरी’ का मुद्दा काफी उछला था। अब विक्रमादित्य सिंह के ताजे बयान ने सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।

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