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विक्रम और बेताल: वह दूरदर्शन शो जिसने रामायण-महाभारत के सितारों को दी पहचान

Entertainment News: आज से 41 साल पहले, साल 1985 में दूरदर्शन पर एक ऐसा शो आया जो भारतीय टेलीविजन इतिहास का मील का पत्थर बन गया। ‘विक्रम और बेताल’ नाम के इस शो ने न सिर्फ दर्शकों को बांधा बल्कि भविष्य के महानायकों को भी तैयार किया। इसके 26 एपिसोड्स आज भी दर्शकों की यादों में ताजा हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इसकी लोकप्रियता कायम है।

इस शो की सबसे बड़ी खासियत इसके कलाकारों का अनोखा समूह था। यहां वे सभी चेहरे मौजूद थे जो बाद में रामानंद सागर की रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों में दिखे। इन धारावाहिकों ने भारतीय टेलीविजन को नए मुकाम पर पहुंचाया। विक्रम और बेताल ने इन कलाकारों के लिए एक तरह से ट्रेनिंग ग्राउंड का काम किया।

अरुण गोविल ने इस शो में राजा विक्रमादित्य की भूमिका निभाई थी। बाद में वे रामायण में श्रीराम के रूप में अमर हो गए। इसी तरह दीपिका चिखलिया, सुनील लहरी और अरविंद त्रिवेदी जैसे कलाकार भी इस शो का हिस्सा थे। यह पहला मौका था जब इतने बड़े कलाकार एक साथ एक शो में नजर आए।

शो की कहानी राजा विक्रमादित्य और बेताल के इर्द-गिर्द घूमती थी। बेताल राजा को 25 कहानियां सुनाता था। हर कहानी के अंत में वह एक पेचीदा सवाल पूछता। अगर राजा जवाब देते तो बेताल वापस पेड़ पर लटक जाता। नहीं तो राजा को फिर से शुरुआत करनी पड़ती।

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ये कहानियां नैतिक मूल्यों और जीवन के गहरे सबक सिखाती थीं। हर कहानी में बुद्धिमत्ता और सही निर्णय लेने का संदेश छिपा होता था। इसने बच्चों और बड़ों, सभी को समान रूप से प्रभावित किया। शो की लोकप्रियता का आलम यह था कि लोग रविवार की सुबह का बेसब्री से इंतजार करते थे।

एक शो से पूरी पीढ़ी का मनोरंजन

उस दौर में टेलीविजन मनोरंजन का प्रमुख साधन था। दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम पूरे परिवार को एक साथ बैठने का मौका देते थे। विक्रम और बेताल ने इस परंपरा को और मजबूत किया। इसने नैतिक शिक्षा और मनोरंजन का अनोखा मिश्रण पेश किया।

शो की सफलता ने रामानंद सागर को भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इसी टीम के कई कलाकारों को अपने महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में शामिल किया। रामायण और महाभारत जैसे धारावाहिकों ने तो टेलीविजन इतिहास रच दिया। इनकी शुरुआत विक्रम और बेताल से ही हुई थी।

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आज भी इस शो को याद किया जाता है। डिजिटल युग में इसके एपिसोड्स यूट्यूब पर लाखों बार देखे जा चुके हैं। नई पीढ़ी भी इन कहानियों से रूबरू हो रही है। शो की कालजयी कहानियां और यादगार परफॉर्मेंस आज भी प्रासंगिक हैं।

टेलीविजन इतिहास में स्वर्णिम अध्याय

विक्रम और बेताल ने भारतीय टेलीविजन को एक नई दिशा दी। इसने साबित किया कि दर्शक गुणवत्तापूर्ण सामग्री की सराहना करते हैं। शो के निर्माताओं ने पौराणिक कहानियों को आधुनिक अंदाज में पेश किया। इसका असर दर्शकों पर गहरा था।

शो की तकनीकी सीमाओं के बावजूद, इसने जादू बिखेर दिया। सेट डिजाइन और स्पेशल इफेक्ट्स उस समय के हिसाब से शानदार थे। कलाकारों के अभिनय ने कहानियों में जान डाल दी। राजा विक्रमादित्य और बेताल का किरदार दर्शकों के दिलों में बस गया।

आज के दौर में जहां कंटेंट की भरमार है, विक्रम और बेताल जैसे शो याद दिलाते हैं कि अच्छी कहानी का कोई विकल्प नहीं है। इसकी सादगी और गहराई ने इसे अमर बना दिया। यह शो भारतीय टेलीविजन की विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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