केंद्र सरकार के आदेशानुसार हरिजन शब्द पर प्रतिबंध लगाए हिमाचल सरकार- दर्शन लाल

आज सुंदर नगर के धनोटू में अनुसूचित जाति/ जनजाति सरकारी कर्मचारी कल्याण संघ के जिला अध्यक्ष, दर्शन लाल की अध्यक्षता में धनोटू में बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में सरकारी कार्यालयों में या आम बोलचाल में प्रयोग किए जा रहे हरिजन शब्द पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हटाने बारे चर्चा की गई। संघ के जिला अध्यक्ष दर्शन लाल ने मांग की है कि हिमाचल में सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार हरिजन शब्द को प्रतिबंधित करे।

दर्शन लाल ने बताया कि इस संबंध में भारत सरकार की तरफ से 22 नंवबर 2012 में सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह स्पष्ट किया जा चुका है। जिसके अनुसूचित जाति वर्ग के लिए हरिजन शब्द का प्रयोग असंवैधानिक करार दिया गया है। इसके साथ हिमाचल प्रदेश सरकार की तरफ से भी 21 अप्रैल 2018 को दिशा निर्देश दिए जा चुके हैं। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक प्रयोग में आने वाले सभी प्रमाणपत्रों और दस्तावेजों के साथ समग्र व्यवहार के लिए हरिजन शब्द का प्रयोग नहीं किया जाएगा। जबकि सरकार के दिशा निर्देशों के बावजूद अभी भी राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान हरिजन शब्द का प्रयोग विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न करता है।

संघ के जिला अध्यक्ष दर्शन लाल

उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि आज भी हरिजन बस्ती के रूप में सड़कों के उदघाटन किए जाते हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों में मंचों से नेताओं द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग की बाहुल्य आबादी वाले गांवों के लिए हरिजन बस्ती सड़क कहकर प्रयोग किया जाता है। कार्यक्रम के बाद यही घटनाक्रम हरिजन बस्ती सड़क के रूप में अखबारों और सोशल मीडिया में उजागर किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन द्वारा इस संबंध में सख्त निर्देश दिए जाने चाहिए ताकि सार्वजनिक कार्यक्रमों के साथ अन्य किसी व्यवहार में प्रतिबंधित हरिजन शब्द का प्रयोग ना किया जाए। उन्होंने कहा कि जिला कार्यकारिणी इस संबंध में उपायुक्त के माध्यम से प्रदेश सरकार के साथ भारत सरकार को अपना पक्ष भेजेगी। बैठक में उपाध्यक्ष भीम सिंह यादव, राज्य प्रेस सचिव एवं जिला कोषाध्यक्ष राजेश नंदा, सुंदर नगर के प्रधान नरेश कुमार, दिनेश कुमार, तीर्थ राम चौहान मौजूद रहे।

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