World News: वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। रूस और ईरान ने इसे सशस्त्र आक्रामकता बताया है। अर्जेंटीना और इक्वाडोर ने अमेरिका का खुला समर्थन किया है। कई यूरोपीय देशों ने संयम बरतने की अपील की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उनकी सेना ने वेनेजुएला पर हमला किया। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया गया। अमेरिका ने मादुरो पर नार्को-आतंकवाद का मुकदमा चलाने की योजना बनाई। इस घटना ने वैश्विक राजनीति में नया संकट खड़ा कर दिया।
रूस और ईरान का विरोध
रूस नेअमेरिकी कार्रवाई को सशस्त्र आक्रामकता करार दिया। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वेनेजुएला को अपना भविष्य तय करने का अधिकार है। बाहरी सैन्य हस्तक्षेप पूरी तरह अस्वीकार्य है। रूस ने बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया।
ईरान के सर्वोच्च नेता ने भी अमेरिकी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह वेनेजुएला की संप्रभुता का खुला उल्लंघन है। झूठे आरोपों के आधार पर दबाव डालने की नीति का डटकर विरोध करना चाहिए। ईरान ने वेनेजुएला के साथ एकजुटता जताई।
लैटिन अमेरिकी देशों की प्रतिक्रिया
कोलंबियाने कहा कि वेनेजुएला पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध है। कोलंबियाई राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि वे सैन्य टकराव नहीं चाहते। उन्होंने सीमा पर अपनी सेना तैनात कर दी। शांति और मानवीय गरिमा की रक्षा उनकी प्राथमिकता है।
क्यूबा ने अमेरिकी कार्रवाई को आपराधिक हमला बताया। क्यूबाई सरकार ने कहा कि यह सिर्फ वेनेजुएला पर नहीं बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका पर हमला है। मेक्सिको ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला देते हुए हस्तक्षेप की निंदा की।
अमेरिका के समर्थक देश
इक्वाडोर केराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने लिखा कि नार्को-चाविस्टा अपराधियों का अंत होने का समय आ गया है। इस बयान का सीधा संबंध वेनेजुएला के शासन से है। इक्वाडोर अमेरिकी कार्रवाई के पक्ष में खड़ा दिखाई दिया।
अर्जेंटीना ने भी अमेरिका का खुला समर्थन किया। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर ‘आजादी आगे बढ़ रही है’ लिखा। उन्होंने इसे तानाशाही के खिलाफ बड़ा कदम बताया। अर्जेंटीना की स्थिति स्पष्ट रूप से अमेरिका के पक्ष में है।
यूरोपीय संघ और सदस्य देश
यूरोपीय संघ केविदेश नीति प्रमुख ने हालात पर नजर रखने की बात कही। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री और कराकास स्थित राजदूत से बात की। यूरोपीय संघ ने कहा कि मादुरो की वैधता विवादित है। किसी भी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन जरूरी है।
जर्मनी ने वेनेजुएला की स्थिति पर चिंता जताई। जर्मन विदेश मंत्रालय कराकास स्थित दूतावास के संपर्क में है। उनकी संकट प्रबंधन टीम सक्रिय है। स्पेन ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
तटस्थ रुख अपनाने वाले देश
ब्रिटेन केप्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरे तथ्य जानना चाहिए। ब्रिटेन अमेरिकी राष्ट्रपति और सहयोगी देशों से बात करेगा। अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर उन्होंने जोर दिया।
इटली की प्रधानमंत्री ने भी तटस्थ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वे वेनेजुएला में रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। वहां करीब 1.6 लाख इटालियन नागरिक रहते हैं। इनमें से अधिकांश के पास दोहरी नागरिकता है।
क्षेत्रीय अस्थिरता की आशंका
ब्राजील केराष्ट्रपति ने चिंता जताई कि यह कार्रवाई अस्वीकार्य सीमा पार करती है। इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता फैल सकती है। चिली ने भी कहा कि संकट का हल बातचीत से निकलना चाहिए। सैन्य हस्तक्षेप से समस्या और बढ़ सकती है।
इंडोनेशिया ने सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की। उन्होंने बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया। आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को शांतिपूर्ण समाधान के लिए काम करना चाहिए।

