New York News: वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के लिए अमेरिका ने बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। इस कदम से पूरी दुनिया की कूटनीति में भूचाल आ गया है। अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने सोमवार को एक आपातकालीन बैठक बुलाई है। इस बैठक की मांग कोलंबिया ने की है। अमेरिका के इस फैसले पर रूस और चीन ने भी सख्त रुख अपनाया है। ये देश शुरू से ही किसी भी विदेशी दखल के खिलाफ रहे हैं।
UN महासचिव ने जताई चिंता
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को एक “खतरनाक मिसाल” बताया है। गुटेरेस का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर हो सकता है। यह कार्रवाई किसी देश की आजादी पर हमला मानी जा सकती है। अमेरिका इसे न्याय बता रहा है, लेकिन वेनेजुएला इसे अपने संसाधनों पर कब्जे की कोशिश कह रहा है।
ट्रंप ने संभाली कमान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब अस्थायी रूप से वेनेजुएला का शासन संभालेगा। यह व्यवस्था तब तक रहेगी जब तक वहां सत्ता का सही तरीके से हस्तांतरण नहीं हो जाता। व्हाइट हाउस ने अभी यह नहीं बताया है कि यह प्रशासन कब तक चलेगा। अमेरिका ने हाल ही में वहां अपनी नौसेना की गतिविधियां भी बढ़ाई थीं।
तेल पर कब्जे की साजिश?
वेनेजुएला ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संयुक्त राष्ट्र में वेनेजुएला के राजदूत सैमुअल मोंकाडा ने इसे “औपनिवेशिक युद्ध” कहा है। उनका कहना है कि अमेरिका की नजर उनके विशाल तेल भंडार पर है। वे वहां अपनी कठपुतली सरकार बनाना चाहते हैं। मोंकाडा ने कहा कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
अमेरिका ने दी ये दलील
दूसरी ओर, अमेरिका ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराया है। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने इसे न्याय की जीत बताया है। उन्होंने कहा कि निकोलस मादुरो एक तानाशाह थे। वे ड्रग्स के व्यापार में शामिल थे। इससे अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा को खतरा था। अमेरिका का कहना है कि यह कदम सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि न्याय के लिए उठाया गया है।

