हाईकोर्ट में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के कुलपति (वीसी) प्रो. सिकंदर कुमार की नियुक्ति को चुनौती देने की याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में अगली सुनवाई 19 अप्रैल को होगी। धर्मपाल की ओर से दायर याचिका कि प्रारंभिक सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश एल नारायण स्वामी और न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने फिलहाल निजी तौर पर प्रतिवादी बनाए वीसी को नोटिस जारी नहीं किया है।

याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार वीसी की नियुक्ति नियमों के विपरीत की गई है। याचिका के माध्यम से अदालत को बताया गया कि प्रतिवादी वीसी को यूजीसी की ओर से जारी रेगुलेशन के तहत 19 मार्च, 2011 को प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत किया गया। 29 अगस्त 2017 को एचपीयू के वीसी के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए। प्रतिवादी ने चयन कमेटी को गुमराह करते हुए अपने आवेदन में अनुभव के बारे में गलत तथ्य दिए। प्रतिवादी ने आवेदन में छह वर्ष और चार महीनों का अनुभव दिया। 1 जनवरी, 2009 से अपने आपको प्रोफेसर बताया, जबकि उन्हें 19 मार्च, 2011 को प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत किया था।

यही नहीं, प्रतिवादी ने 10 जून, 2008 से 31 दिसंबर, 2008 तक के समय को दो बार गिना, जो कि यूजीसी के रेगुलेशन के विपरीत है। प्रार्थी ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई है कि प्रतिवादी को आदेश दिया जाए कि एचपीयू के वीसी की नियुक्ति के लिए अपनी योग्यता अदालत को बताए और यदि योग्यता यूजीसी के रेगुलेशन के विपरीत पाई जाती है तो उस स्थिति में नियुक्ति रद्द की जाए।

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