National News: क्या आप जानते हैं कि किसी को ‘हरिजन’ कहना आपको जेल की हवा खिला सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में ही इस शब्द के इस्तेमाल को अपराध की श्रेणी में डाल दिया था। अब हरियाणा सरकार ने भी एक बड़ा कदम उठाया है। सरकारी कामकाज में ‘हरिजन’ और ‘गिरिजन’ शब्दों के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब सरकारी दस्तावेजों में केवल अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) शब्द ही लिखे जाएंगे।
गांधी जी ने क्यों दिया था ‘हरिजन’ नाम?
महात्मा गांधी ने 1932 के पुणे पैक्ट के बाद दलितों के लिए ‘हरिजन’ शब्द का इस्तेमाल शुरू किया था। गांधी जी गुजरात के संत नरसी मेहता से बहुत प्रभावित थे। नरसी मेहता ने भगवान राम (हरि) की भक्ति करने वालों को ‘हरिजन’ कहा था। गांधी जी का मानना था कि अछूत माने जाने वाले लोग ‘ईश्वर के लोग’ हैं। उनका मकसद समाज में फैली छुआछूत को मिटाना और समरसता लाना था। उन्होंने 1933 में ‘हरिजन’ नाम से एक अंग्रेजी पत्रिका भी शुरू की थी।
डॉ. अंबेडकर को इस नाम पर आपत्ति क्यों थी?
डॉ. भीमराव अंबेडकर गांधी जी के इस विचार से सहमत नहीं थे। उनका मानना था कि अछूतों को ‘हरिजन’ कहना उनका अपमान करने जैसा है। अंबेडकर का तर्क था कि दलित भी समाज का वैसे ही हिस्सा हैं जैसे अन्य जातियां। उन्हें अलग नाम देना गलत है। डॉ. अंबेडकर ‘दलित’ शब्द के पक्षधर थे। उनके अनुसार, यह शब्द उनकी सामाजिक स्थिति को सही ढंग से बयां करता था। ‘दलित’ शब्द का सबसे पहले प्रयोग समाज सुधारक ज्योतिराव फुले ने किया था।
‘गिरिजन’ शब्द पर भी विवाद
गांधी जी ने आदिवासियों के लिए ‘गिरिजन’ शब्द का प्रयोग किया था। इसका अर्थ था ‘पहाड़ों पर रहने वाले लोग’। लेकिन आदिवासी समुदाय ने इस पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि वे इस देश के मूल निवासी हैं, इसलिए उन्हें गिरिजन न कहा जाए। इसी विरोध को देखते हुए संविधान में उन्हें ‘अनुसूचित जनजाति’ का दर्जा दिया गया। ओडिशा सरकार ने भी अगस्त 2025 में इस शब्द के इस्तेमाल पर रोक का आदेश जारी किया था।
हरियाणा सरकार का ताजा फैसला
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सरकारी दस्तावेजों से इन शब्दों को हटाने का आदेश दिया है। हालांकि, हरियाणा में मोरनी हिल्स के अलावा कोई बड़ा पहाड़ी क्षेत्र नहीं है। फिर भी, यह फैसला दलितों और आदिवासियों के सम्मान से जुड़ा है। सरकार का मानना है कि गांवों में प्रयोग होने वाले ऐसे शब्द गरिमापूर्ण नहीं हैं। दलित समुदाय लंबे समय से इन शब्दों का विरोध करता आ रहा है।
धर्म बदलने पर भी नहीं मिटा भेदभाव
दलित शब्द किसी एक धर्म तक सीमित नहीं है। भारत में हिंदुओं के अलावा बौद्ध, जैन और सिख धर्म में भी दलित वर्ग है। इस्लाम और ईसाई धर्म अपनाने वाले लोगों में भी यह भेदभाव देखने को मिलता है। यूरोपीय ईसाई अक्सर काले और भूरे रंग वाले ईसाइयों से बराबरी का व्यवहार नहीं करते। इसी तरह, कुछ मुस्लिम समुदायों में भी जाति और बिरादरी के आधार पर भेदभाव देखा जाता है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
दलित अपने आत्मसम्मान को लेकर अब ज्यादा जागरूक हैं। साल 1982 में केंद्र सरकार ने राज्यों को ‘हरिजन’ शब्द का प्रयोग न करने की सलाह दी थी। इसके बाद 2013 में सामाजिक न्याय मंत्रालय ने भी रोक लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में साफ कर दिया कि किसी को अपमानित करने के लिए ‘हरिजन’ कहना दंडनीय अपराध है। अब हरियाणा सरकार का यह फैसला इसी दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।
