National News: अमेरिका द्वारा भारत पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चर्चाओं के बीच भारत ने स्पष्ट रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत के ऊर्जा संबंधी निर्णय बाजार की स्थितियों और देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में यह बात कही।
यह प्रतिक्रिया अमेरिकी सीनेट में पेश एक प्रस्तावित बिल के संदर्भ में आई है। इस बिल के तहत रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान है। अमेरिका ने पहले ही भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा रखा है।
भारत ने क्या दिया जवाब?
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत प्रस्तावित बिल से अवगत है। भारत इससे जुड़ी गतिविधियों को बारीकी से देख रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत का ऊर्जा दृष्टिकोण दो मुख्य बातों पर केंद्रित है।
पहला, वैश्विक बाजार की परिस्थितियों का आकलन। दूसरा, 1.4 अरब भारतीयों को सस्ती दर पर ऊर्जा उपलब्ध कराना। भारत इन दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बनाता है।
जायसवाल ने कहा कि भारत की ऊर्जा नीति पारदर्शी और बाजार आधारित है। यह देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। भारत अपने नागरिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।
अमेरिकी बिल में क्या है खास?
यह बिल सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पेश किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बिल को जनवरी 2026 में समर्थन दिया था। अमेरिका का आरोप है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर उसकी युद्ध फंडिंग में मदद कर रहा है।
बिल के पास होने की स्थिति में अमेरिका रूसी तेल, गैस या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर कम से कम 500 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता है। अमेरिकी मीडिया का कहना है कि यह बिल ट्रंप प्रशासन को अधिक शक्ति देगा।
वहीं, अमेरिका का दोहरा रवैया भी सामने आया है। अमेरिका स्वयं रूस से यूरेनियम खरीदता है। यह तथ्य अमेरिकी आरोपों की सच्चाई पर सवाल खड़ा करता है।
व्यापार समझौते पर क्या है भारत का रुख?
विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी वाणिज्य मंत्री की टिप्पणी को भी गलत बताया। अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने दावा किया था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता इसलिए नहीं हुआ क्योंकि प्रधानमंत्री ने ट्रंप को फोन नहीं किया।
जायसवाल ने इस दावे का खंडन किया। उन्होंने बताया कि दोनों देश 13 फरवरी से व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। दोनों पक्षों ने कई दौर की वार्ता की है। कई बार समझौते के करीब पहुंचे हैं।
उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स में दी गई जानकारी सही नहीं है। भारत दो पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच पारस्परिक लाभ का समझौता चाहता है। भारत इस समझौते को पूरा करने की आशा रखता है।
पिछली बातचीत का क्या हुआ?
जायसवाल ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 2025 में आठ बार फोन पर बातचीत हुई। इन वार्ताओं में द्विपक्षीय साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। यह तथ्य अमेरिकी दावों का खंडन करता है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता पिछले साल टूट गई थी। इसके बाद अगस्त में ट्रंप प्रशासन ने भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था।
इसमें 25 प्रतिशत लेवी भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद के जवाब में थी। बाकी 25 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ थे। अब नया प्रस्ताव इन टैरिफ को 500 प्रतिशत तक बढ़ाने की बात कर रहा है।
आगे की राह क्या है?
भारत ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत वैश्विक बाजार में उपलब्ध सर्वोत्तम विकल्पों का चयन करेगा। यह निर्णय आर्थिक और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत की नीति सुसंगत रही है। देश अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन करता है। भारत अमेरिका के साथ संवाद जारी रखने के पक्ष में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों देशों को संतुलित समाधान खोजने की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और वार्ता होने की संभावना है।

