बुधवार, जनवरी 14, 2026
4.7 C
London

US Plane Crash: जब अमेरिका में आसमान से गिरे दो परमाणु बम; बर्फ में दफन हो गई थी 3 जिंदगी

World News: अमेरिका के इतिहास में एक रात ऐसी भी थी, जब दो परमाणु बम आसमान से जमीन पर आ गिरे थे। यह घटना जनवरी 1964 की है। पश्चिमी मैरीलैंड के सैवेज माउंटेन पर अमेरिकी वायुसेना का एक बी-52 बॉम्बर विमान क्रैश हो गया था। इस विमान में हिरोशिमा को तबाह करने वाले बमों से कई गुना ज्यादा ताकतवर दो परमाणु बम लदे थे। गनीमत रही कि बम नहीं फटे, वरना अमेरिका का एक बड़ा हिस्सा नक्शे से मिट जाता। इस हादसे में तीन क्रू मेंबर्स की दर्दनाक मौत हो गई थी।

कोल्ड वॉर का वो खतरनाक मिशन

यह दौर शीत युद्ध (Cold War) का था। सोवियत संघ के हमले के डर से अमेरिका ने ‘क्रोम डोम’ मिशन चलाया था। इसके तहत परमाणु बमों से लदे बी-52 विमान 24 घंटे आसमान में गश्त करते थे। 13 जनवरी 1964 को ‘बज वन फोर’ नाम का विमान अपनी नियमित उड़ान पर था। इसमें 24 मेगाटन की ताकत वाले दो बी-53 हाइड्रोजन बम रखे थे। इनकी ताकत इतनी थी कि ये हजारों शहरों को पल भर में राख कर सकते थे।

यह भी पढ़ें:  वैज्ञानिक खुलासा: एलियन यान नहीं, बर्फ का टुकड़ा था रहस्यमय ओमुआमुआ

तूफान ने तोड़ दी विमान की पूंछ

रात के करीब साढ़े ग्यारह बजे विमान मैरीलैंड के ऊपर से गुजर रहा था। बाहर बर्फीला तूफान चल रहा था। अचानक मौसम बिगड़ा और विमान खतरनाक टर्बुलेंस में फंस गया। झटके इतने तेज थे कि विमान का पिछला हिस्सा (वर्टिकल स्टेबलाइजर) टूटकर अलग हो गया। पायलट मेजर थॉमस मैककॉर्मिक ने विमान से नियंत्रण खो दिया। मौत सामने देख उन्होंने तुरंत पूरी टीम को विमान छोड़ने (Eject) का आदेश दे दिया।

बर्फ में जिंदगी और मौत की जंग

पायलट मैककॉर्मिक और को-पायलट पार्कर पीडिन पैराशूट से कूदने में सफल रहे। मैककॉर्मिक को जल्द ही मदद मिल गई। लेकिन पीडिन 36 घंटे तक माइनस तापमान में जंगल में भटकते रहे। बचाव दल ने उन्हें बाद में जिंदा ढूंढ निकाला। लेकिन बाकी तीन साथी इतने खुशकिस्मत नहीं थे। रडार बॉम्बार्डियर मेजर रॉबर्ट टाउनली विमान से नहीं निकल पाए और मलबे में उनकी मौत हो गई।

यह भी पढ़ें:  चिहुआहुआ रेगिस्तान: इस रहस्यमयी जगह पर 'सुसाइड' कर लेते है इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वैज्ञानिक भी हो रहे हैरान

ठंड ने ले ली दो की जान

नेविगेटर मेजर रॉबर्ट ली और सार्जेंट मेल्विन वूटेन पैराशूट से तो कूद गए, लेकिन कुदरत से हार गए। उस रात ठंड जानलेवा थी। वूटेन घायल थे और कुछ दूर चलकर गिर पड़े। हाइपोथर्मिया (शरीर का ठंडा पड़ना) से उनकी और मेजर रॉबर्ट ली की मौत हो गई। कई दिनों बाद बर्फ में उनके शव मिले थे।

सुरक्षित मिले मौत के सौदागर

हादसे के बाद सबसे बड़ा डर उन दो परमाणु बमों का था। सेना ने तुरंत सर्च ऑपरेशन चलाया। गनीमत यह थी कि बम ‘अनआर्म्ड’ (निष्क्रिय) थे। गिरने के बाद भी उनमें विस्फोट नहीं हुआ। न ही कोई रेडिएशन फैला। सेना ने दोनों बमों को सुरक्षित बरामद कर लिया। इस तरह अमेरिका अपनी ही धरती पर एक महाविनाश का शिकार होते-होते बचा।

Hot this week

Related News

Popular Categories