विभाग की लापरवाही के कारण 18 साल बाद भी बेरोजगार, नही जोड़े नॉन एम्प्लॉयमेंट सर्टिफिकेट के अंक

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Himachal News: हिमाचल में युवाओं के कैरियर के साथ कैसे खिलवाड़ किया जाता है, यह समझने के आपको यह खबर पढ़ना बेहद जरूरी है। अब इसको लापरवाही कहें या हिमाचल के युवाओं को नौकरियों से बाहर रखने की साजिश, इसका खुलासा तो तब होगा जब जांच होगी। लेकिन यहां कोई जांच करने के लिए भी तैयार नही है।

जानकारी के मुताबिक एक युवक जोकि सुरेश कुमार, तहसील बल्ह जिला मंडी का रहने वाला है को शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण नौकरी से वंचित रहना पड़ा। अब यह बेचारा दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हो गया है। सरकार ने पिछले 20 सालों में 15000 शिक्षक नियमों को दरकिनार करते हुए, और बिना कमीशन और वेचवाइज भर्ती के नौकरी पर रखे है। 2002 से आज तक एससी एसटी का रोस्टर और बैकलॉग नही भरा गया। इसके बाबजूद जो योग्य युवा है उनको लापरवाही या जानबूझ कर नौकरियों से बाहर रखा गया है।

शिक्षा विभाग की इन गलतियों के चलते और गैर कानूनी भर्तियों के चलते सुरेश कुमार आज भी बेरोजगार ही रह गया। अब जब 18 साल बाद सुरेश कुमार को नौकरी मिलने जा रही थी, तो शिक्षा विभाग ने लापरवाही कर दी और सुरेश कुमार को नौकरी से वंचित कर दिया। बता दें कि 30 सितंबर, 2020 को सुरेश कुमार वैचवाईज भर्ती की कॉउंसलिंग के लिए कमेटी के सामने उपस्थित हुआ। सभी जरुरी सर्टिफिकेट कमेटी को दे दिए गए। निमानुसार कुल 3.43 अंक बनते थे। लेकिन कमेटी ने इनको नौकरी से बाहर रखना था। इसके चलते नॉन एम्प्लॉयमेंट सर्टिफिकेट का बहाना बनाया गया।

सुरेश कुमार ने जो नान इंप्लाई का सर्टीफिकेट कमेटी को दिया, वह जून महीने का बना था। इस सर्टीफिकेट पर तहसीलदार के हस्ताक्षर है, इडैंटीफिकेशन नंबर भी है। लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण तारीख नहीं थी। शिक्षा विभाग ने सर्टीफिकेट में तारीख नही होने के कारण सुरेश कुमार को नौकरी से वंचित कर दिया। जबकि इसमें उम्मीदवार को कोई गलती नही थी। क्योंकि तारीख तहसीलदार ऑफिस में डाली जानी चाहिए थी नाकि उम्मीदवार द्वारा। इतना ही नही शिक्षा विभाग ने नॉन एम्प्लॉयमेंट प्रमाण पत्र की जांच तक नही करवाई। जिसके चलते सुरेश कुमार को नौकरी से वंचित होना पड़ा।

शिक्षा विभाग अगर प्रमाण पत्र की जांच करवाता तो सुरेश कुमार को 1 अंक मिलता और उसको नौकरी मिल जाती। इतना ही नही शिक्षा विभाग ने सुरेश कुमार की जगह जिस उम्मीदवार को नौकरी दी जीके कुल अंक 2.69 बनते है। सुरेश कुमार अपनी समस्या लेकर डायरेक्टर प्रारभिंक शिक्षा विभाग से मिला। लेकिन अभी तक इसकी समस्या का निराकरण नहीं हूआ है। इसलिए सुरेश कुमार ने शिक्षा विभाग से गुहार लगाई है कि उसके सर्टीफिकेट की जांच करवाई जाए और उसे एक अंक प्रदान करके नौकरी पर लगाया जाए।

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