Delhi News: संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार को नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। उनकी यह यात्रा द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग के कई समझौते हुए हैं। इस दौरे से इन संबंधों में और गहराई आने की उम्मीद है।
भारत और यूएई के संबंध पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देशों ने व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाई है। वर्ष 2022 में हस्ताक्षरित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते ने इसे नया आयाम दिया है। यह समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है।
CEPA समझौते ने दिए व्यापार को बढ़ावा
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता यानी CEPA वर्ष 2022 में लागू हुआ था। यह समझौता सिर्फ वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। इसमें सेवाओं, बौद्धिक संपदा और निवेश का आदान-प्रदान भी शामिल है। समझौते के तहत अधिकांश वस्तुओं पर आयात शुल्क को कम या खत्म कर दिया गया। इससे द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इस समझौते का सकारात्मक प्रभाव साफ दिखाई दे रहा है। वर्ष 2025 के पहले छह महीनों में तेल को छोड़कर अन्य श्रेणियों में द्विपक्षीय कारोबार 37.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक गैर-तेल व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
यूएई भारत का सातवां सबसे बड़ा निवेशक
संयुक्त अरब अमीरात भारत में निवेश के मामले में सातवें स्थान पर है। वर्ष 2000 से अब तक यूएई ने भारत में 22 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष निवेश किया है। यह निवेश विभिन्न क्षेत्रों में फैला हुआ है। इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्यात में भारत को विशेष लाभ मिला है। यूएई बाजार में इन उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
हाल के दिनों में दोनों देशों ने वित्तीय सहयोग को नई दिशा दी है। रुपया-दिरहम व्यापार निपटान व्यवस्था लागू की गई है। यूएई ने भारत के यूपीआई डिजिटल भुगतान सिस्टम को मंजूरी दी है। इन कदमों से अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम हो रही है। यह द्विपक्षीय व्यापार को और सुगम बनाएगा।
यूएई भारत को कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का एक प्रमुख स्रोत है। ऊर्जा सुरक्षा के मामले में यह साझेदारी बहुत महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंध भी मजबूत हुए हैं। हाल ही में भारतीय थलसेना प्रमुख ने यूएई की यात्रा की थी। इस दौरान सैन्य सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी थी।
दोनों देश समुद्री सुरक्षा और संयुक्त सैन्य अभ्यास पर सहमत हैं। यह सहयोग क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अहम माना जाता है। संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले भारतीय प्रवासी इस रिश्ते की मजबूत कड़ी हैं। वहां लगभग 35 लाख भारतीय निवास करते हैं। यह समुदाय द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करता है।
शेख मोहम्मद बिन जायद की इस यात्रा में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इनमें निवेश, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं। दोनों नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे। यह दौरा रणनीतिक साझेदारी को नई गति देगा।
