International News: 14 जून 1985 का वह दिन विमानन इतिहास के काले पन्नों में दर्ज है। ट्रांस वर्ल्ड एयरलाइंस (TWA) की फ्लाइट 847 ने काहिरा से उड़ान भरी थी। उसे एथेंस और रोम होते हुए अमेरिका पहुंचना था। लेकिन एथेंस से सवार हुए दो आतंकवादियों ने इस सफर को मौत के तांडव में बदल दिया। पिस्तौल और ग्रेनेड के दम पर उन्होंने पूरे विमान को बंधक बना लिया। यह हाईजैकिंग अगले 17 दिनों तक चली। इसमें एक अमेरिकी सैनिक की हत्या हुई और दर्जनों जिंदगियां दांव पर लगी रहीं।
कॉकपिट में खून और दहशत की शुरुआत
विमान जैसे ही रोम के लिए एथेंस से उड़ा, दो हमलावर खड़े हुए। उन्होंने फ्लाइट सर्विस मैनेजर उली डेरिकसन को बुरी तरह पीटा। आतंकी जबरन कॉकपिट में घुस गए। उन्होंने कैप्टन जॉन टेस्ट्रेक के सिर पर बंदूक तान दी। हमलावर मोहम्मद अली हम्मादी ने खुद को हिजबुल्लाह का लड़ाका बताया। उसने पायलट को विमान लेबनान की तरफ मोड़ने का आदेश दिया। बेरूत एटीसी ने पहले लैंडिंग से मना किया। लेकिन कैप्टन ने बताया कि आतंकी ग्रेनेड उड़ाने वाले हैं। हारकर एटीसी ने इजाजत दी।
फ्यूल के बदले इंसानों का सौदा
बेरूत एयरपोर्ट पर विमान कई घंटे खड़ा रहा। आतंकियों ने ईंधन की मांग की। एयरपोर्ट प्रशासन ने मना कर दिया। काफी देर चली बातचीत के बाद एक सौदा हुआ। आतंकियों ने 19 यात्रियों को रिहा किया। इसके बदले में उन्हें विमान के लिए ईंधन मिला। यहां से विमान अल्जीरिया के लिए रवाना हुआ। वहां लैंडिंग के बाद आतंकियों ने अपनी मुख्य मांगें रखीं।
इजरायल और अमेरिका के सामने कड़ी शर्तें
आतंकियों ने इजरायल की जेलों में बंद 766 शिया मुस्लिमों की रिहाई मांगी। उन्होंने कुवैत धमाकों के आरोपियों को छोड़ने की शर्त भी रखी। इसके अलावा इजरायली सेना की लेबनान से वापसी की मांग की गई। अल्जीरिया में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। आतंकी विमान को लेकर फिर बेरूत लौटे। इस बार विमान में 12 और हथियारबंद आतंकी सवार हो गए।
यूएस नेवी के जवान की बेरहमी से हत्या
बेरूत लौटते ही आतंकियों ने दरिंदगी शुरू कर दी। उन्होंने अमेरिकी सैनिक रॉबर्ट स्टेथम को बुरी तरह पीटा। इसके बाद उनके सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। स्टेथम का शव रनवे पर फेंक दिया गया। आतंकियों ने यहूदी नाम वाले सात यात्रियों को अलग कर जेल भेज दिया। स्थिति बेकाबू होती देख ग्रीक सरकार ने भी आतंकियों के एक साथी को रिहा कर दिया। इसके बदले में प्रसिद्ध गायक डेमिस रूसोस सहित आठ नागरिकों को छोड़ा गया।
17 दिन बाद मिली आजादी और कैदियों की रिहाई
तीसरे दिन विमान फिर अल्जीरिया गया। वहां 58 बंधकों को छोड़ा गया। बाद में बाकी 39 लोगों को बेरूत की एक जेल में शिफ्ट कर दिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और लेबनानी नेताओं के हस्तक्षेप के बाद बातचीत सफल हुई। 30 जून को आखिरी 45 बंधकों को रिहा किया गया। इस घटना के बाद इजरायल ने भी 700 से ज्यादा शिया कैदियों को आजाद किया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने जर्मनी में सभी यात्रियों का स्वागत किया। यह घटना आज भी सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता मानी जाती है।


