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तुर्की ने भारत को भेजी राहत सामग्री की खेप, महात्मा गांधी को किया याद, कहा, भारत की मदद को नही भूले


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कोरोना वायरस की दूसरी लहर का सामना कर रहे भारत की मदद के लिए तुर्की ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। तुर्की ने पांच ऑक्सीजन जनरेटर सहित 50 टन राहत सामग्री भारत भेजी है। साथ ही तुर्की ने महात्मा गांधी और सूफी कवि जलालुद्दीन रूमी को भी याद किया है। बुधवार को दो तुर्की A400M सैन्य मालवाहक विमानों द्वारा राहत सामग्री भेजी गई। पूरी राहत सामग्री को बॉक्सेस में पैक किया गया था, जिस पर 13 वीं शताब्दी के सूफी कवि रूमी के शब्द लिखे थे… “निराशा के बाद आशा और अंधेरे के बाद कई सूरज हैं.” साथ में यह भी लिखा था कि “भारत के लोगों के लिए तुर्की के प्यार के साथ।”

तुर्की उन दर्जनों देशों में शामिल हो गया है, जिन्होंने ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों सहित सैकड़ों टन चिकित्सा आपूर्ति और उपकरण वितरित किए हैं।

ताकि भारत को दूसरी लहर के बीच ऑक्सीजन और अन्य सामग्रियों की भारी कमी को दूर करने में मदद मिल सके, जहां पर हर दिन 4 लाख से अधिक कोरोना संक्रमित मिलने लगे थे। तुर्की दूतावास के एक बयान में बुधवार की देर रात पांच ऑक्सीजन जनरेटर, 50 वेंटिलेटर, 680 ऑक्सीजन सिलेंडर और एंटीवायरल दवा के 50,000 बक्से सहित आपूर्ति की डिलीवरी का उल्लेख किया गया। साथ ही तुर्की के इतिहास में भारतीय नेताओं की ओर से निभाई गई भूमिका को याद भी किया गया।

‘भारतीयों की मदद को हम नहीं भूले’

बयान में कहा गया, “भारतीय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने तुर्की के मुक्ति युद्ध (1919-1923) का समर्थन करने के लिए धन इकट्ठा किया था। डॉ मुख्तार अहमद अंसारी ने चिकित्सा मिशन का नेतृत्व किया। उन्होंने 1912 में बाल्कन युद्धों के दौरान घायल तुर्क सैनिकों के इलाज के लिए ओटोमन साम्राज्य और क्षेत्रीय अस्पतालों की स्थापना की। तुर्की के लोगों की यादों से अभी भी भारतीयों की यह सहायता और योगदान भूला नहीं है।”

‘राहत सामग्री की सबसे बड़ी खेपों में से एक’

तुर्की के राजदूत फिरत सुनेल ने कहा कि उनके देश की ओर से दूसरी लहर के बीच भेजी गई यह सहायता सबसे बड़ी खेपों में से एक थी। विदेश मंत्री ने 26 अप्रैल को अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान राहत सामग्री भेजने की पेशकश की थी। राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोआन के विशेष सलाहकार इब्राहिम कालिन ने राहत सामग्री वितरण की देखरेख की थी।


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