ईरान पर हमले के बाद ट्रंप की हुंकार: ‘परमाणु बम का नाम भी नहीं ले पाएगा तेहरान’, क्या दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की ओर धकेल रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति?

USA News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर किए गए हमले को वैश्विक सुरक्षा के लिए ‘अनिवार्य’ करार दिया है। ट्रंप का दावा है कि इस सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान अब परमाणु हथियार बनाने के बारे में सोच भी नहीं सकेगा। उन्होंने तेहरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वहां की सरकार ने महज कुछ हफ्तों में 32 हजार प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतार दिया। ट्रंप ने साफ किया कि वह युद्ध के पक्षधर नहीं हैं, लेकिन मध्य एशिया को परमाणु विनाश से बचाने के लिए ईरान की सैन्य शक्ति को कमजोर करना जरूरी था। इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है।

परमाणु खतरे और ‘होर्मुज’ पर ट्रंप की दोटूक

ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान के पास परमाणु हथियार होते, तो वह पल भर में पूरे मध्य एशिया को तबाह कर सकता था। उन्होंने कहा कि अमेरिका के इस अभियान ने ईरान की सेना की कमर तोड़ दी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने इस कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि पूरा पश्चिमी जगत ईरान को निरस्त्र करने के पक्ष में है। ट्रंप ने चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों से आह्वान किया है कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजें। उनका तर्क है कि इस समुद्री मार्ग के सुरक्षित रहने से पूरी दुनिया को ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति मिलेगी।

नाटो और यूरोप में मची खलबली

ट्रंप की इस मांग ने नाटो (NATO) के भविष्य पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। उन्होंने ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में दोटूक कहा कि अगर अन्य देश इस संकट में अमेरिका का साथ नहीं देते, तो यह नाटो के अस्तित्व के लिए बुरा होगा। ट्रंप के इस रुख ने यूरोपीय संघ के देशों को सोच में डाल दिया है। जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उनके सैन्य उद्देश्य आखिर कब तक पूरे होंगे। यूरोप इस मामले में और अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहा है।

आतंकी शासन और ऊर्जा संकट का डर

व्हाइट हाउस का मानना है कि ईरानी शासन एक ‘आतंकवादी शासन’ की तरह व्यवहार कर रहा है। कैरोलिन लीविट के अनुसार, ईरान ऊर्जा के मुक्त प्रवाह को रोकने की कोशिश कर रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि अमेरिका अकेले ही यह लड़ाई नहीं लड़ सकता। वे चाहते हैं कि जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी अपनी सुरक्षा और व्यापारिक हितों के लिए इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाएं। हालांकि, बिना पूर्व परामर्श के किए गए इस हमले ने सहयोगियों के बीच भरोसे की कमी पैदा कर दी है।

क्या होगा अगला कदम?

ईरान पर इस हमले के बाद अब सबकी नजरें मध्य पूर्व की अगली हलचलों पर टिकी हैं। क्या ईरान इस हमले का जवाबी पलटवार करेगा या ट्रंप की रणनीति उसे बातचीत की मेज पर लाने में सफल होगी? ट्रंप का यह अभियान ‘वैश्विक शांति’ के नाम पर शुरू हुआ है, लेकिन इसने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मान रहे हैं कि अगर स्थिति और बिगड़ी, तो तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। फिलहाल, पूरा विश्व ट्रंप की इस आक्रामक विदेश नीति के परिणामों का इंतजार कर रहा है।

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