New Delhi News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक बड़ा प्रस्ताव दिया है। उन्होंने पीएम मोदी को अपने महत्वकांक्षी ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का औपचारिक न्योता भेजा है। ट्रंप ने इसे दुनिया के झगड़ों को सुलझाने का एक ऐतिहासिक और साहसिक प्रयास बताया है। यह बोर्ड मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट में शांति लाने का काम करेगा। भारत के लिए यह कूटनीतिक रूप से एक बड़ी खबर है।
गाजा में शांति के लिए बना नया बोर्ड
ट्रंप ने इस बोर्ड की रूपरेखा गाजा पट्टी में शांति बहाली के लिए तैयार की है। यह इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम के बाद सक्रिय होगा। अमेरिका इसे एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन के तौर पर पेश कर रहा है। इसका मुख्य काम गाजा में दोबारा निर्माण और व्यवस्था को संभालना होगा। जानकारों का मानना है कि यह बोर्ड भविष्य में दुनिया के दूसरे बड़े विवादों को भी सुलझाने में मदद करेगा।
भारत को चुकाने होंगे 1 बिलियन डॉलर?
इस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की अध्यक्षता खुद डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। अगर भारत उनका न्योता स्वीकार करता है, तो वह अगले तीन साल के लिए इसका सदस्य बन जाएगा। शुरुआती तीन साल के लिए सदस्यता मुफ्त होगी। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके बाद स्थायी सदस्य बने रहने के लिए भारी कीमत चुकानी होगी। स्थाई सदस्यता के लिए हर देश को 1 बिलियन डॉलर (करीब 8400 करोड़ रुपये) देने पड़ सकते हैं। इस फंड का इस्तेमाल बोर्ड के कामकाज में होगा।
हथियार वापस लेने से लेकर सुरक्षा तक की जिम्मेदारी
इस बोर्ड में शामिल देश गाजा में सीजफायर पर पैनी नजर रखेंगे। वे वहां नई फिलिस्तीनी समिति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित करेंगे। हमास से हथियार वापस लेने की प्रक्रिया भी यही बोर्ड देखेगा। गाजा को फिर से बसाने और वहां स्थिरता लाने की पूरी जिम्मेदारी इसी निकाय के कंधों पर होगी। राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि यह बोर्ड प्रभावी शासन का समर्थन करेगा।
राजदूत ने साझा की चिट्ठी की जानकारी
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर ट्रंप की चिट्ठी साझा की है। ट्रंप ने लिखा कि पीएम मोदी का इस मिशन में जुड़ना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने 29 सितंबर को गाजा संघर्ष खत्म करने के लिए एक व्यापक प्लान बनाया था। अपनी चिट्ठी में ट्रंप ने 20 सूत्रीय रोडमैप का भी जिक्र किया है।
पाकिस्तान और कनाडा को भी न्योता
भारत के अलावा इस बोर्ड में करीब 50 देशों को बुलाया गया है। इसमें इजरायल, मिस्र, तुर्की, कतर के साथ-साथ पाकिस्तान और कनाडा भी शामिल हैं। सदस्यों की फाइनल लिस्ट दावोस में होने वाली वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की बैठक में जारी हो सकती है। इस बोर्ड की कार्यकारी समिति में ब्रिटेन के पूर्व पीएम टोनी ब्लेयर और वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा जैसे दिग्गज शामिल हैं।

