New Delhi News: जमीन के बदले नौकरी मामले में लालू यादव और उनके परिवार को बहुत बड़ा झटका लगा है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व रेल मंत्री लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपियों पर आरोप तय करने का आदेश दे दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में माना है कि लालू यादव ने मंत्री पद का गलत इस्तेमाल किया था। इस फैसले से आरजेडी सुप्रीमो और उनके परिवार की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
लालू यादव समेत 41 लोगों पर चलेंगे मुकदमे
विशेष जज विशाल गोगने ने शुक्रवार को यह अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में कुल 41 लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। वहीं, सबूतों के अभाव में 52 लोगों को बरी कर दिया गया है। सीबीआई की चार्जशीट में लालू यादव के अलावा उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटी मीसा भारती और बेटे तेजस्वी यादव का नाम मुख्य आरोपियों में शामिल है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को निजी तौर पर अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।
29 जनवरी को तय होंगे आरोप
बचाव पक्ष के वकील अजाज अहमद ने मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लालू यादव, तेजस्वी, तेज प्रताप और हेमा यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120बी (साजिश) और धारा 13 के तहत केस चलेगा। आरोप तय करने की औपचारिक प्रक्रिया 29 जनवरी को पूरी की जाएगी। इससे पहले सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि उनकी लिस्ट में शामिल 103 आरोपियों में से पांच की मौत हो चुकी है।
क्या है जमीन के बदले नौकरी घोटाला?
सीबीआई के मुताबिक, यह पूरा मामला 2004 से 2009 के बीच का है। उस समय लालू यादव केंद्र में रेल मंत्री थे। आरोप है कि रेलवे के जबलपुर जोन में ग्रुप-डी की नौकरी देने के लिए नियमों को तोड़ा गया। जांच एजेंसी का दावा है कि ये नौकरियां उन लोगों को दी गईं, जिन्होंने इसके बदले में लालू यादव के परिवार या करीबियों को जमीन दी। ये जमीनें तोहफे के रूप में या बेहद कम दाम पर ली गई थीं। सीबीआई इसे भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश मान रही है।

