India News: देश भर में आज लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। यह पुराने ट्रैफिक चालानों को जल्दी से निपटाने का एक शानदार मौका है। दस जनवरी को होने वाली इस लोक अदालत में आप अपने जुर्माने को कम करा या माफ करा सकते हैं।
लोक अदालत एक वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र है। यह अदालतें साधारण मामलों को त्वरित न्याय दिलाती हैं। इनमें ट्रैफिक नियम उल्लंघन के अधिकांश मामले शामिल होते हैं। यह प्रक्रिया कम खर्चीली और समय की बचत करने वाली है।
किन चालानों में मिल सकती है राहत?
लोक अदालत में सामान्य ट्रैफिक उल्लंघनों पर विचार होता है। बिना हेलमेट वाहन चलाने के चालान में राहत मिल सकती है। सीट बेल्ट न लगाने के जुर्माने भी कम हो सकते हैं।
गलत जगह पर वाहन पार्क करने के मामले भी इसमें आते हैं। ट्रैफिक सिग्नल तोड़ने के चालान भी निपटाए जा सकते हैं। वाहन का प्रदूषण प्रमाणपत्र न होना भी इसमें शामिल है।
वाहन बीमा नवीनीकरण न कराने पर भी चर्चा होती है। इन सभी मामलों में जुर्माने की राशि कम की जा सकती है। कई बार पूरा जुर्माना माफ भी हो जाता है। यह न्यायाधीश और दोनों पक्षों की सहमति पर निर्भर करता है।
किन गंभीर मामलों में नहीं मिलती राहत?
सभी प्रकार के ट्रैफिक उल्लंघन लोक अदालत के दायरे में नहीं आते। शराब पीकर वाहन चलाने के गंभीर मामले इसमें शामिल नहीं हैं। यह एक गंभीर अपराध माना जाता है।
जानलेवा रफ्तार से वाहन चलाने के मामले भी बाहर रहते हैं। हिट एंड रन के केस भी लोक अदालत में नहीं सुने जाते। इन अपराधों की सुनवाई नियमित अदालतों में होती है।
लोक अदालत का उद्देश्य छोटे विवादों का निपटारा करना है। गंभीर अपराधों को इस प्रक्रिया में नहीं लाया जाता। इससे न्यायिक प्रणाली पर बोझ भी कम होता है।
लोक अदालत जाने के लिए जरूरी दस्तावेज
लोक अदालत में जाने से पहले कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार रखें। सबसे पहले चालान की मूल या फोटोकॉपी साथ ले जाएं। वाहन के पंजीकरण प्रमाण पत्र की कॉपी भी आवश्यक है।
ड्राइविंग लाइसेंस की कॉपी भी जरूरी दस्तावेज है। अपना पहचान प्रमाण पत्र जैसे आधार कार्ड ले जाएं। वोटर पहचान पत्र भी पहचान साबित करने के काम आता है।
इन दस्तावेजों के बिना आपका मामला नहीं सुना जा सकता। सही दस्तावेजों से प्रक्रिया तेज और सुचारू होती है। इससे आपका और अदालत दोनों का समय बचता है।
लोक अदालत की कार्यवाही कैसे होती है?
लोक अदालत में पहुंचने पर सबसे पहले एक टोकन लेना होता है। यह टोकन आपकी सुनवाई का क्रम निर्धारित करता है। इसके बाद आपकी बारी आने पर मामला सामने आता है।
न्यायाधीश और विशेषज्ञ दोनों पक्षों की बात सुनते हैं। वह एक समझौता प्रस्ताव रखते हैं। यदि दोनों पक्ष प्रस्ताव से सहमत हो जाते हैं तो मामला समाप्त हो जाता है।
इस समझौते को अदालत का आदेश माना जाता है। इस आदेश के खिलाफ किसी न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती। यह प्रक्रिया पारंपरिक अदालती प्रक्रिया से कहीं तेज होती है।
लोक अदालत के लाभ
लोक अदालत का सबसे बड़ा लाभ समय की बचत है। नियमित अदालतों में मामले सालों लटके रहते हैं। लोक अदालत में मामला एक ही दिन में निपट जाता है।
इस प्रक्रिया में बहुत कम खर्च आता है। नियमित अदालतों में वकीलों और अदालती फीस अधिक लगती है। लोक अदालत में यह खर्च बहुत कम या नगण्य होता है।
यह प्रक्रिया तनाव मुक्त और सरल होती है। अदालत का औपचारिक माहौल यहां नहीं होता। यह विवाद समाधान की एक प्रभावी और लोकप्रिय पद्धति बन गई है।

