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कल प्रदेश भर में काले झंडे लगा कर किया जाएगा सरकार की पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियों का विरोध


जैसा कि आप सभी को विदित है कि कल देश भर में काले झंडे लगा कर सरकार की पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने की नीतियों और काले कृषि कानूनों का विरोध किया जाएगा। इस संदर्भ में आज हिमाचल में विभिन्न संगठनों ने मीट मीटिंग का आयोजन किया गया था, इस ऑनलाइन बैठक में हरियाणा से विनोद और सुमित किसान संयुक्त मोर्चा की ओर से जुड़े थे। इस बैठक में प्रदेश भर के बुद्धिजीवियों ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित की तथा किसानों और मजदूरों के समर्थन में अपनी बात कही।

विनोद गिल छात्र नेता हरियाणा ने बताया कि काले झंडे लगा कर विरोध प्रदर्शन करने का आयोजन किसान आंदोलन के छह माह पूरे होने के कारण किया जा रहा है। क्योंकि छह महीनों से किसान आंदोलन कर रहे है और सरकार के कानों पर जूं तक नही रेंग रही। जोकि सरकार की गरीब किसानों के प्रति रवैये को उजागर करता है। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन गांव के स्तर पर भी किया जाएगा। ताकि सरकार तक सभी की आवाज पहुंचे और सरकार नव निर्मित कृषि कानूनों को वापिस ले।

सुनीत दलाल किसान नेता ने अपनी बात रखते हुए किसान आंदोलन पर प्रकाश डाला तथा सभी को जानकारी दी कि कब से आंदोलन शुरू हुआ और कब कब क्या क्या घटनाएं घटी। उन्होंने बताया कि किसान आंदोलन 10 जून से शुरू हुआ था तथा आज दिन तक चलता जा रहा है और सरकार का किसानों के लिए नकारात्मक रवैया देश के लिए सही नही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नए कानून समाज के हर वर्ग के पिछड़े हुए लोगों, किसानों और मजदूरों के लिए सही नही है। इन कानूनों से हर वर्ग को समस्या का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि कोई भी राजनीतिक दल जोकि किसान आंदोलन का समर्थन नही करेगा उसका पूर्ण रूप से बहिष्कार किया जाएगा। ताकि सरकार की किसान, मजदूर और पिछड़ों की विरोधी गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि आंदोलन केवल टिकरी बॉर्डर पर ही नही हो रहा बल्कि यह आंदोलन 15 अलग अलग जगह किया जा रहा है। जहां लगभग 15 किमी के दायरे में लगभग 500 संगठनों के लोग ठहरे हुए है। जोकि सरकार की किसान, मजदूर और पिछड़ों के प्रति नीतियों के लिए लगातार संघर्ष कर रहे है।

इसी बैठक में हिमाचल प्रदेश के मंडी से अमर सिंह राघवा भी शामिल हुए थे उन्होंने भी सरकार की किसान विरोधी नीतियों का विरोध करते हुए कहा कि आज हिमाचल के सभी किसानों को संगठित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के 80% किसान छोटा है या फिर शिक्षित नही है। जिसके कारण किसान संगठित नही हो रहा। उन्होंने किसानों को संगठित करने की बात पर जोर देते हुए कहा कि कल हम भी किसान संयुक्त मोर्चा के समर्थन में काले झंडे लगा कर सरकार की नीतियों का विरोध करेंगे। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार आरएसएस और भाजपा के कार्यकर्ताओं के भरोसे ना रहे। उनकी रिपोर्ट हमेशा सही नही होती। किसान, मजदूर और पिछड़े लोग सरकार की नीतियों से खफा हो चुके है और आने वाले समय में भाजपा सरकार बनना असंभव है।

इस बैठक में रामपुर से बिहारी सेओगी भी शामिल हुए थे। उन्होंने सरकार की नीतियों को मजदूर विरोधी बताते हुए सभी लोगों से आवाहन किया कि सब एक साथ सरकार के खिलाफ लामबंद हो। तभी सरकार अपनी नीतियों में बदलाव करेगी। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार की यह नीतियां बहुत पहले से है। भाजपा पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए कुछ भी कर सकती है। उन्होंने जानकारी देते हुए कहा कि भाजपा ने कोरोना काल में मजदूरों के हित में बने 44 कानूनों में बदलाव कर दिया है। जोकि कतईमजदूरों के पक्ष में नही है। उन्होंने बताया कि ऐसे ही काले कानून 1905-06 में अंग्रेज लेकर आए थे, और उस समय भारत के किसानों के विरोध ने उनको झुकने पर मजबूर कर दिया था। उन्होंने आशा जताई कि आने वाले समय में भाजपा सरकार भी इन कानूनों को वापिस लेगी और पूंजीपतियों के विरूद्ध कानून बनाने पर मजबूर होगी।

बिहारी सेओगी में हिमाचल प्रदेश की भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि सरकार के काम बिलकुल भी जनता हितैषी नही है। जयराम सरकार ने कुमारसैन में प्रयोग किए हुए ग्लव्स फ्रंट लाइन कोरोना वारियर्स नर्सों के लिए भेजे जोकि एक बेहद निंदनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि जयराम सरकार आशा वर्कर से काम तो पूरा ले रही है लेकिन उनको समय पर सैलरी नही दे रही। उन्होंने सवाल पूछते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने पूंजीपतियों के 68835 करोड़ का एनपीए माफ कर दिया लेकिन मजदूरों के लिए क्या किया?

पूर्व जिला परिषद संत राम ने भी इस बैठक में भाग लिया तथा सरकार के मजदूरों और किसानों के प्रति नकारात्मक रवैये की कड़ी आलोचना की तथा कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां किसान और मजदूर के खिलाफ एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है। आरएसएस और भाजपा के लोग गरीब जनता को भ्रमित कर रहे है। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश सरकार कितनी मजदूर विरोधी है इस बात का पता इसी बात से चल जाता है कि सरकार ने सरसों के तेल के दाम सरकारी डिपो पर मनरेगा की दिहाड़ी से ज्यादा कर दिए है। उन्होंने कहा कि वह भी किसान आंदोलन के समर्थन में कल काला झंडा लगाएंगे और सरकार की नीतियों का विरोध जताएंगे।

इस बैठक में पंकज वैश, सोलन समाजिक कार्यकर्ता, मोंटी कटोच, काँगड़ा, सामाजिक कार्यकर्ता, विकेंदेर सूद,रोहड़ू, आप किसान नेता, जगदीश रेड्डी, सराज, किसान नेता कांग्रेस, पंकज,भीम आर्मी, हैप्पी पराशर, सीपीआईएम, किसान नेता, अमर सिंह राघवा, किसान नेता सुन्दरनगर, सुरेश कुमार अध्यक्ष राइट फाउंडेशन आदि समेत भी बहुत से संगठनों के लोग शामिल हुए थे। सभी संगठनों के लोगों ने सरकार की मजदूर, किसान और पिछड़ों के दमन के लिए बनाए कानूनों और नीतियों की आलोचना की और सभी ने कहा कि वह कल 26 मई को काले झंडे लगा कर विरोध दर्ज करेंगे और किसान संयुक्त मोर्चा के समर्थन करेंगे।

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