New Delhi News: आज का दिन बिहार की राजनीति और राजद प्रमुख Lalu Prasad Yadav के लिए बेहद अहम है। दिल्ली हाईकोर्ट सोमवार को उनकी एक याचिका पर सुनवाई करने जा रहा है। इस याचिका में उन्होंने आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में तय किए गए आरोपों को चुनौती दी है। यह मामला निचली अदालत के फैसले के खिलाफ है, जिसमें उनके और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।
क्या है लालू यादव की दलील?
यह मामला न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में सुना जाएगा। अपनी याचिका में Lalu Prasad Yadav ने दावा किया है कि उनके खिलाफ केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने राऊज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसमें उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे।
निचली अदालत ने दिया था झटका
इससे पहले दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 13 अक्टूबर को Lalu Prasad Yadav को बड़ा झटका दिया था। कोर्ट ने लालू, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने आईपीसी की धारा 428, 120बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दी थी। इसी फैसले के खिलाफ लालू यादव ने अब हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
रेल मंत्री रहते हुए घोटाले का आरोप
सीबीआई ने यह केस जुलाई 2017 में दर्ज किया था। एजेंसी का आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए Lalu Prasad Yadav ने पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित होटलों का ठेका सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड को दिया। आरोप है कि इसके लिए कोचर बंधुओं को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
जमीन के बदले होटल का खेल
सीबीआई के अनुसार, इस एहसान के बदले में Lalu Prasad Yadav के परिवार को पटना में कीमती जमीन मिली। कोचर बंधुओं ने यह जमीन पहले एक कंपनी को बेची, जो राजद सांसद प्रेमचंद गुप्ता से जुड़ी थी। बाद में इस कंपनी और जमीन का मालिकाना हक राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के पास आ गया। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की थी।
