आउट ऑफ टर्म प्रमोशन के खेल में तीन बीएसए निलंबित, लेखाधिकारी भी संदिग्ध

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UP News: उत्तर प्रदेश के शामली (Shamli) जिले में शिक्षकों (Teacher) को कनिष्ठ से वरिष्ठ बनाने का मामला जब खुलने लगा तो विभाग में हड़कंप मच गया. करीब पांच साल से चल रही मामले की जांच में प्रशासन ने गंभीरता से जांच की तो वर्तमान बीएसए और दो पूर्व बीएसए के खिलाफ निलंबन की संस्तुति की गई. जांच में दोषी पाए लेखाधिकारी और बीएसए में भी कार्रवाई शुरू होने से विभाग में हड़कंप मच गया है. मामले की जांच कर रहे एसडीएम ने दोषी मानते हैं, वर्तमान बीएससी गीता वर्मा एवं दो पूर्व बीएसए के निलंबन की संस्तुति की है.

इस पूरे मामले में लेखाधिकारी की भी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है. बता दें कि साल 2017-18 में तत्कालीन बीएसए चंद्रशेखर ने प्राथमिक शिक्षकों को कनिष्ठ से वरिष्ठ शिक्षक के पद पर प्रोन्नति दी थी.

कई शिक्षकों ने इसकी शिकायत की. तत्कालीन डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने जांच कराई तो आरोप सही पाए गए. साथ ही वरिष्ठ कोषाधिकारी ज्ञानेंद्र पांडे ने लेखाधिकारी राजेंद्र कौशिक को दोषी मानते हुए, उनके खिलाफ प्रकरण की रिपोर्ट डीएम को दी. लेकिन लेखाधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की और इस पूरे प्रकरण को ठंडे बस्ते में डाल दिया.

शामली निवासी अनुज राणा ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत कमिश्नर सहारनपुर से की. जिसके बाद कमिश्नर सहारनपुर ने इस मामले की रिपोर्ट डीएम जसजीत कौर को सौंपी. डीएम जसजीत कौर ने एसडीएम देवेंद्र को नामित किया. एसडीएम देवेंद्र कुमार ने बताया कि 23 शिक्षकों को कनिष्ठ से वरिष्ठ शिक्षक बनाने के गंभीर मामलों को लंबित रखने के लिए तत्कालीन बीएसए चंद्रशेखर व अनुराधा शर्मा तथा वर्तमान बीएसए गीता वर्मा को कार्रवाई न करने का दोषी पाते हुए तत्काल निलंबन करने की संस्तुति की गई है.

कमिश्नर सहारनपुर को भेजी रिपोर्ट
एसडीएम के मुताबिक जांच में लेखाधिकारी की भी भूमिका संदिग्ध पाई गई है. उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट डीएम जसजीत कौर को सौंप दी है. डीएम शामली द्वारा कमिश्नर सहारनपुर को जांच रिपोर्ट भेजी जाएगी, जिसके उपरांत तीनों बीएसए पर निलंबन की कार्रवाई तय है.

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