International News: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। वॉशिंगटन ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। पेंटागन ने दक्षिण चीन सागर से अपने ‘कैरियर स्ट्राइक ग्रुप’ को तुरंत मिडिल ईस्ट भेजने का आदेश दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब ईरान के भीतर सरकार विरोधी प्रदर्शन हिंसक हो चुके हैं। अमेरिकी रक्षा मुख्यालय का यह एक्शन सीधे तौर पर ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी माना जा रहा है।
मिडिल ईस्ट में बरपेगा USS अब्राहम लिंकन का कहर
पेंटागन के मुताबिक, यह स्ट्राइक ग्रुप अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अधिकार क्षेत्र में तैनात होगा। सूत्रों के अनुसार, इस घातक समूह की कमान परमाणु संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर ‘USS अब्राहम लिंकन’ के पास है। इस बेड़े में कई आधुनिक युद्धपोत और कम से कम एक अटैक सबमरीन भी शामिल है। इस पूरे सैन्य दल को मिडिल ईस्ट पहुंचने में करीब एक हफ्ते का समय लगेगा। विशेषज्ञ इसे अमेरिका की सैन्य रणनीति में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा बदलाव मान रहे हैं।
ईरान में भड़की विद्रोह की आग और ट्रंप के ‘सीक्रेट’ विकल्प
ईरान में महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। प्रदर्शनों को आज 18 दिन बीत चुके हैं और अब तक 2600 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। संचार ठप होने के बावजूद खबरें आ रही हैं कि 18,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ सैन्य, साइबर और मनोवैज्ञानिक अभियानों की जानकारी दी गई है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह प्रदर्शनकारियों के साथ हो रहे व्यवहार पर नजर बनाए हुए है।
अमेरिकी दूतावासों पर ‘हाई अलर्ट’ जारी
क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए कतर स्थित ‘अल उदैद एयर बेस’ से कुछ अमेरिकी कर्मचारियों को हटा लिया गया है। वहीं, सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी है। दूतावास ने गैर-जरूरी यात्राएं टालने और अपनी सुरक्षा योजनाएं तैयार रखने को कहा है। ईरान के पड़ोसी देशों को डर है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई से पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा तबाह हो सकती है।
साइबर और मनोवैज्ञानिक युद्ध की तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति को दिए गए विकल्पों में केवल हवाई हमले ही शामिल नहीं हैं। इसमें ईरान के बुनियादी ढांचे को साइबर हमले के जरिए पंगु बनाने की योजना भी है। अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के जरिए ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों ने हालांकि इस मिशन के सटीक लक्ष्यों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन यह तैनाती साफ संकेत है कि अमेरिका किसी भी स्थिति से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर है।
