Himachal News: कड़ाके की ठंड ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। पहाड़ हो या मैदान, हर जगह तापमान लगातार गिरता जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ी चिंता बिजली के बिल और महंगे हीटर की होती है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए रूम हीटर का खर्चा उठाना आसान नहीं होता। कई इलाकों में तो बिजली कटौती के कारण महंगे उपकरण भी बेकार साबित होते हैं। लेकिन अब घबराने की जरूरत नहीं है। सोशल मीडिया पर एक ऐसा ‘देसी जुगाड़’ वायरल हो रहा है, जो बिना बिजली खर्च किए आपके कमरे को भट्ठी जैसा तपा देगा। यह तरीका न केवल सस्ता है, बल्कि त्वचा के लिए भी सुरक्षित है।
कमरे की इन्सुलेशन है सबसे जरूरी
देसी हीटर बनाने से पहले कमरे को तैयार करना बेहद आवश्यक है। अगर कमरे की गर्मी बाहर निकलती रही, तो कोई भी उपाय काम नहीं करेगा। खिड़कियों के शीशे ठंड को तेजी से अंदर खींचते हैं। आप इन पर थर्माकोल शीट या मोटे पर्दे लगा सकते हैं। दरवाजों के नीचे और खिड़कियों के किनारों से आने वाली हवा को रोकना जरूरी है। इसके लिए आप पुराने कपड़ों या टेप का इस्तेमाल करें। ठंड अक्सर फर्श से भी चढ़ती है, इसलिए जमीन पर दरी या कालीन जरूर बिछाएं। कमरा सील होने के बाद ही यह जुगाड़ असरदार साबित होगा।
देसी हीटर तैयार करने की विधि
इस हीटर को बनाने के लिए आपको बिजली के तार या प्लग की जरूरत नहीं है। इसके लिए सिर्फ 4 ईंटें, एक मिट्टी का गमला, कुछ मोमबत्तियां और एल्युमिनियम फॉयल चाहिए। इसे बनाने का तरीका बहुत ही आसान और वैज्ञानिक है।
- सबसे पहले समतल जगह पर दो ईंटों को आमने-सामने खड़ा करें।
- एक ईंट को पीछे की तरफ लगाएं ताकि गर्मी एक तरफ सुरक्षित रहे।
- चौथी ईंट को बीच में आधार के रूप में रखें।
- अब बीच वाली ईंट पर 3 से 4 टी-लाइट मोमबत्तियां जलाकर रख दें।
- अंत में मिट्टी के गमले को ईंटों के ऊपर उल्टा करके रख दें।
- गमले के ऊपरी छेद को फॉयल पेपर से अच्छी तरह ढक दें।
विज्ञान और फायदों को समझें
यह देसी जुगाड़ पूरी तरह से विज्ञान पर आधारित है। मोमबत्ती की लौ गमले के अंदर की हवा को गर्म करती है। मिट्टी का गुण होता है कि वह गर्मी को सोखती है और लंबे समय तक होल्ड करती है। फॉयल पेपर गर्म हवा को ऊपर जाने से रोकता है और उसे रिफ्लेक्ट करता है। कुछ ही देर में गमला रेडिएटर की तरह काम करने लगता है। इलेक्ट्रिक हीटर हवा की नमी सोख लेते हैं, लेकिन यह तरीका कमरे की नमी बनाए रखता है। इससे त्वचा में रूखापन नहीं आता और आंखों में जलन भी नहीं होती।
सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य
यह तरीका सस्ता और प्रभावी जरूर है, लेकिन इसमें आग का इस्तेमाल होता है। इसलिए सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। इस सेटअप को हमेशा समतल जगह पर ही बनाएं। इसे पर्दों, चादरों या किसी भी ज्वलनशील वस्तु से दूर रखें। घर में छोटे बच्चे या पालतू जानवर हैं, तो विशेष ध्यान दें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रात को सोते समय इसे जलता हुआ न छोड़ें। हवादार कमरे में ही इसका प्रयोग करें ताकि ऑक्सीजन की कमी न हो। थोड़ी सी समझदारी से आप कड़कड़ाती ठंड में भी गर्मी का आनंद ले सकते हैं।
