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IUI ट्रीटमेंट फेल होने के पीछे छुपी हैं ये 5 बड़ी वजहें, एक भी गलती बढ़ा सकती है परेशानी

Health News: जो जोड़े लंबे समय से गर्भधारण के लिए प्रयास कर रहे हैं, वे IUI और IVF के बारे में जानते हैं। ये दोनों प्रजनन उपचार हैं। लेकिन प्रक्रिया, लागत और सफलता दर के मामले में दोनों में बड़ा अंतर है। सही निर्णय लेने के लिए इन दोनों को समझना जरूरी है।

IUI यानी इंट्रायूटेराइन इनसेमिनेशन को कृत्रिम गर्भाधान भी कहते हैं। यह आईवीएफ की तुलना में सरल और कम आक्रामक प्रक्रिया है। इसमें ओव्यूलेशन के समय प्रसंस्कृत शुक्राणु को सीधे गर्भाशय में डाला जाता है।

किन स्थितियों में IUI की सलाह दी जाती है

IUI को आमतौर पर प्रजनन उपचार का पहला चरण माना जाता है। यह उन महिलाओं के लिए उपयुक्त हो सकता है जिन्हें पीसीओएस जैसे ओव्यूलेशन विकार हों। हल्के पुरुष कारक बांझपन के मामलों में भी यह सहायक है।

गर्भाशय ग्रीवा के बलगम से जुड़ी समस्या होने पर IUI मददगार हो सकता है। अस्पष्टीकृत बांझपन या एकल महिलाएं जो दाता शुक्राणु का उपयोग कर रही हों, उनके लिए भी यह एक विकल्प है। डॉक्टर आमतौर पर तीन से चार IUI चक्र के बाद आईवीएफ की सलाह देते हैं।

भारत में IUI और IVF की लागत कितनी है

भारत में IUI की लागत आईवीएफ की तुलना में काफी कम है। एशियनइनफर्टिलिटी की रिपोर्ट के अनुसार एक IUI चक्र की औसत लागत पांच से दस हजार रुपये के बीच होती है। इसमें दवाएं, निगरानी और शुक्राणु प्रसंस्करण शामिल है।

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वहीं आईवीएफ की प्रक्रिया अधिक जटिल होती है। इसकी लागत भी अधिक होती है। भारत में एक आईवीएफ चक्र का खर्च आमतौर पर अस्सी हजार से डेढ़ लाख रुपये तक हो सकता है। इसमें अंडे निकालना और भ्रूण स्थानांतरण शामिल है।

दोनों उपचारों की सफलता दर में क्या अंतर है

आईवीएफ की तुलना में IUI की सफलता दर कम होती है। लेकिन हल्की प्रजनन समस्याओं में IUI बेहतर विकल्प माना जाता है। IUI की सफलता उम्र और चिकित्सीय स्थिति पर निर्भर करती है। प्रति चक्र IUI की सफलता दर करीब दस से बीस प्रतिशत होती है।

तीन से चार चक्र के बाद युवतियों में कुल सफलता चालीस से पचास प्रतिशत तक पहुंच सकती है। आईवीएफ की सफलता दर पैंतीस वर्ष से कम उम्र की महिलाओं में चालीस प्रतिशत तक हो सकती है। उम्र बढ़ने के साथ यह दर घटती जाती है।

IUI के असफल होने की पांच प्रमुख वजहें

नोवा आईवीएफ फर्टिलिटी के अनुसार IUI सस्ता और आसान जरूर है। लेकिन कुछ कारण इसकी सफलता को प्रभावित कर सकते हैं। खराब गुणवत्ता वाले अंडे एक बड़ा कारण हैं। ऐसे अंडों में गुणसूत्रीय समस्याएं हो सकती हैं।

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इससे निषेचन या भ्रूण विकास प्रभावित होता है। उम्र का बढ़ना भी एक महत्वपूर्ण कारक है। पैंतीस वर्ष से कम उम्र में IUI की सफलता अधिक होती है। इसके बाद संभावना तेजी से घटती है।

शुक्राणु गुणवत्ता और समय का महत्व

कमजोर या कम सक्रिय शुक्राणु फैलोपियन ट्यूब तक नहीं पहुंच पाते। यह IUI की विफलता का एक प्रमुख कारण बन सकता है। गलत समय पर उपचार कराना भी समस्या पैदा कर सकता है।

अगर ओव्यूलेशन के बारह से चौबीस घंटे के भीतर शुक्राणु मौजूद न हों, तो अंडा नष्ट हो सकता है। गर्भाशय की परत की समस्या भी एक बाधा है। यदि गर्भाशय की परत सही न हो, तो निषेचित अंडा प्रत्यारोपित नहीं हो पाता।

किन बातों का रखें ध्यान

उपचार से पहले संपूर्ण स्वास्थ्य जांच बहुत जरूरी है। अनुभवी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। उपचार के दौरान दी गई सभी दवाओं का नियमित सेवन करना चाहिए। तनाव प्रबंधन भी महत्वपूर्ण है।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से सफलता की संभावना बढ़ सकती है। संतुलित आहार और पर्याप्त आराम की आवश्यकता होती है। नियमित रूप से डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए। किसी भी समस्या की स्थिति में तुरंत सलाह लेनी चाहिए।

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