New Delhi News: शरीर में बढ़ता कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) किसी साइलेंट किलर से कम नहीं है। यह धीरे-धीरे आपकी नसों को ब्लॉक करना शुरू कर देता है। इसका सबसे बड़ा कारण आपकी खराब आदतें और गलत खानपान है। जब खून में बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल (LDL) का लेवल बढ़ता है, तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा सिर पर मंडराने लगता है। डाइटिशियन का मानना है कि आप अपनी डाइट में बदलाव करके इस खतरे को टाल सकते हैं। ऐसे 4 खास फल हैं, जो कुदरती तौर पर आपकी नसों की सफाई करते हैं।
सेब: घर का डॉक्टर
सेब को लेकर कहावत है कि यह डॉक्टर को दूर रखता है। यह बात कोलेस्ट्रॉल कम करने में भी सटीक बैठती है। सेब में ‘पेक्टिन’ नाम का फाइबर भरपूर मात्रा में होता है। यह तत्व बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसके अलावा, सेब में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स आपके दिल की सेहत को मजबूत बनाते हैं।
एवोकाडो: गुड फैट का खजाना
एवोकाडो में मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स की अच्छी मात्रा होती है। यह शरीर से बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाता है और गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। इसमें फाइबर भी बहुत ज्यादा होता है। यह फाइबर नसों में जमी गंदगी को बाहर निकालने का काम करता है।
अंगूर: नसों की सफाई
जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल लेवल हाई रहता है, उन्हें अंगूर जरूर खाने चाहिए। अंगूर में ‘रेस्वेराट्रॉल’ नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। यह ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल दोनों को कंट्रोल करता है। इसके नियमित सेवन से दिल की बीमारियों का जोखिम कम होता है।
केला: फाइबर से भरपूर
केला एक कॉमन फल है, लेकिन इसके फायदे बहुत खास हैं। इसमें घुलनशील फाइबर होता है। यह फाइबर कोलेस्ट्रॉल को आंतों में अवशोषित होने से पहले ही रोक लेता है। रोजाना केला खाने से शरीर से एक्स्ट्रा फैट बाहर निकलने लगता है।
शरीर में दिखने वाले खतरे के संकेत
NCBI की रिपोर्ट्स बताती हैं कि हाई कोलेस्ट्रॉल अक्सर खामोशी से हमला करता है। फिर भी शरीर कुछ संकेत देता है, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
- सीने में दर्द: चलने या सीढ़ियां चढ़ते समय छाती में भारीपन महसूस होना।
- सांस फूलना: थोड़ा सा काम करने पर ही सांस का चढ़ जाना।
- पैरों में दर्द: चलते समय पैरों में अजीब सा दर्द या अकड़न होना।
- पीले धब्बे: आंखों या पलकों के आसपास पीले रंग के उभार (Xanthelasma) दिखना।
- लगातार थकान: बिना मेहनत किए भी शरीर का थका हुआ महसूस होना।
डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि साल में कम से कम एक बार लिपिड प्रोफाइल ब्लड टेस्ट जरूर करवाएं। इससे समय रहते खतरे का पता चल जाता है।
