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गधे की ये 3 बातें बना देंगी आपको करोड़पति! आचार्य चाणक्य का यह गुप्त मंत्र बदल देगा आपकी किस्मत

Shimla: आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी उतनी ही कारगर हैं, जितनी सदियों पहले थीं। उन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता से चंद्रगुप्त मौर्य को सम्राट बनाया था। चाणक्य ने जीवन में सफलता पाने के लिए कई अहम बातें बताई हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आचार्य चाणक्य ने गधे से भी सीखने की सलाह दी है? उन्होंने अपनी नीति में गधे के तीन ऐसे गुणों का जिक्र किया है, जो किसी भी इंसान को फर्श से अर्श तक पहुंचा सकते हैं। अगर आप इन तीन बातों को जीवन में उतार लें, तो सफलता आपके कदम चूमेगी।

सफलता के लिए गधे के 3 गुण

आचार्य चाणक्य ने एक श्लोक के जरिए गधे के गुणों का वर्णन किया है। श्लोक है- ‘सुश्रान्तोऽपि वहेद् भारं शीतोष्णं न पश्यति। सन्तुष्टश्चरतो नित्यं त्रीणि शिक्षेच्च गर्दभात्॥’ इसका अर्थ बहुत गहरा है। चाणक्य कहते हैं कि हमें गधे से तीन बातें जरूर सीखनी चाहिए। पहली, अपना बोझ ढोना यानी आलस्य छोड़ना। दूसरी, सर्दी-गर्मी की परवाह न करना। तीसरी, जो मिले उसमें संतुष्ट रहना। आइए इन गुणों को विस्तार से समझते हैं।

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1. आलस्य छोड़ें और लक्ष्य पर नजर रखें

चाणक्य नीति के अनुसार, इंसान को अपने लक्ष्य के प्रति गधे की तरह समर्पित होना चाहिए। गधा काफी थका होने के बाद भी अपना बोझ ढोता रहता है। वह तब तक नहीं रुकता जब तक मंजिल पर न पहुंच जाए। आपको भी अपने लक्ष्य को पाने के लिए आलस्य त्यागना होगा। रास्ते की कठिनाइयों से घबराने के बजाय सिर्फ अपनी मंजिल पर फोकस करें। लगातार मेहनत ही सफलता की कुंजी है।

2. हर परिस्थिति में डटे रहें

सफलता का रास्ता कभी आसान नहीं होता। चाणक्य कहते हैं कि गधा सर्दी, गर्मी या बारिश की परवाह नहीं करता। वह हर मौसम में अपना काम करता रहता है। इसी तरह आपको भी विपरीत परिस्थितियों में घबराना नहीं चाहिए। सुख हो या दुख, काम नहीं रुकना चाहिए। जो व्यक्ति हर हालात में अपने कर्तव्य का पालन करता है, उसे जीतने से कोई नहीं रोक सकता। मौसम और हालात बदलते रहेंगे, लेकिन आपका प्रयास जारी रहना चाहिए।

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3. जो मिले उसमें संतुष्ट रहें

जीवन में संतोष होना बहुत जरूरी है। गधे को जहां भी थोड़ी बहुत घास मिलती है, वह उसे खाकर संतुष्ट हो जाता है। वह खाने के लिए नखरे नहीं करता। आचार्य चाणक्य सीख देते हैं कि इंसान को भी उपलब्ध संसाधनों में खुश रहना चाहिए। संसाधनों की कमी का रोना रोने से बेहतर है कि जो पास है, उसी से काम शुरू करें। संतोष के साथ काम करने वाला व्यक्ति हमेशा तनावमुक्त रहता है और तेजी से आगे बढ़ता है।
(अस्वीकरण: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।)

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