गैस सिलिंडर के लिए मची त्राहि-त्राहि: होटलों में फिर लौटे पुराने दिन, कोयले के दामों ने भरी ऐसी उड़ान कि उड़ गए सबके होश!

Bihar News: गैस सिलिंडर की किल्लत और अनियमित आपूर्ति ने आम जनजीवन के साथ-साथ कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि होटलों, रेस्तरां और चाय की दुकानों से गैस चूल्हे गायब होने लगे हैं और उनकी जगह फिर से पारंपरिक भट्ठी चूल्हों ने ले ली है। ईंधन के इस संकट के कारण बाजार में अचानक कोयले की मांग बढ़ गई है, जिससे इसकी कीमतों में भारी उछाल आया है। महज छह दिन पहले 18 रुपये किलो बिकने वाला कोयला अब 24 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गया है।

कोयले की मांग में जबरदस्त उछाल और महंगाई

व्यापारियों का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलिंडर की अनुपलब्धता के कारण उनके पास कोयले के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। लहेरियासराय, बेंता और स्टेशन रोड के दुकानदारों ने बताया कि कल तक जो कोयला बाजार में मुश्किल से बिकता था, आज उसे खरीदने के लिए होड़ मची है। मांग बढ़ते ही मुनाफाखोरों ने भी दाम बढ़ा दिए हैं। स्थिति यह है कि दुकानदार अब महंगे दामों पर कोयला खरीदने को मजबूर हैं ताकि उनकी दुकानदारी चलती रहे।

मिट्टी और लोहे के चूल्हों का बाजार हुआ गर्म

गैस संकट ने एक बार फिर कुम्हारों और लोहारों के धंधे में जान फूंक दी है। मौलागंज और हसनचक जैसे इलाकों में कारीगर अब मूर्ति और सुराही बनाना छोड़कर युद्ध स्तर पर भट्ठी चूल्हे तैयार कर रहे हैं। बाजार में 220 लीटर वाले लोहे के ड्रम को काटकर बनाए गए पोर्टेबल चूल्हों की मांग सबसे अधिक है। इन चूल्हों की कीमत क्षमता के अनुसार 2500 रुपये से लेकर 4500 रुपये तक वसूली जा रही है। कारीगरों का कहना है कि फिलहाल वे केवल इसी मांग को पूरा करने पर ध्यान दे रहे हैं।

इंडक्शन और हीटर की बिक्री ने पकड़ी रफ्तार

गैस सिलिंडर की कमी का असर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के बाजार पर भी दिख रहा है। मध्यम वर्गीय परिवारों और बड़े होटलों में इंडक्शन चूल्हे और हीटर की बिक्री काफी बढ़ गई है। घरेलू इंडक्शन जहां 1500 से 4500 रुपये के बीच मिल रहे हैं, वहीं कमर्शियल इस्तेमाल वाले इंडक्शन की कीमत 9000 से 12000 रुपये तक पहुंच गई है। दुकानदारों के अनुसार, सप्लाई चेन प्रभावित होने और मांग बढ़ने से इन चूल्हों की कीमतों में भी तेजी देखी जा रही है।

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