New Delhi News: देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। यह फैसला रोड टैक्स को लेकर है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब कारखानों और खदानों में चलने वाली मशीनों पर टैक्स नहीं लगेगा। यह खबर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाई कोर्ट के पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया है।
किन वाहनों को मिली है छूट?
सुप्रीम कोर्ट ने इंडस्ट्रियल और कंस्ट्रक्शन कंपनियों के पक्ष में फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि फैक्ट्रियों या खदानों के अंदर चलने वाली मशीनें मोटर वाहन नहीं हैं। इनमें डंपर, क्रेन, लोडर और रोड रोलर शामिल हैं। इन पर अब कोई रोड टैक्स नहीं वसूला जाएगा। भले ही ये मशीनें धीमी गति से चल सकती हैं, फिर भी ये सामान्य गाड़ियों की तरह नहीं हैं।
अल्ट्राटेक सीमेंट ने दी थी चुनौती
यह मामला अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। गुजरात हाई कोर्ट ने निर्माण उपकरणों पर मोटर वाहन टैक्स लगाने की अनुमति दी थी। अब शीर्ष अदालत ने उस फैसले को पलट दिया है। इससे सीमेंट, खनन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को काफी फायदा होगा।
सड़क पर आए तो देना होगा जुर्माना
कोर्ट ने एक अहम शर्त भी रखी है। अगर ये भारी मशीनें सार्वजनिक सड़कों पर चलती पाई जाती हैं, तो नियम बदल जाएंगे। तब इन पर मोटर वाहन अधिनियम लागू होगा। ऐसी स्थिति में मालिकों को रोड टैक्स देना होगा। साथ ही, नियम तोड़ने पर जुर्माना भी वसूला जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि रोड टैक्स सिर्फ सार्वजनिक सड़कों पर चलने वाले वाहनों के लिए है।
कानून में क्या है प्रावधान?
कोर्ट ने अपने फैसले में कानूनों का भी जिक्र किया। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि गुजरात मोटर वाहन टैक्स अधिनियम में ऐसे उपकरणों पर टैक्स का जिक्र नहीं है। ये वाहन विशेष प्रकार के हैं जो सिर्फ इंडस्ट्रियल एरिया में यूज होते हैं। इसलिए इनसे रोड टैक्स मांगना गलत है। इस फैसले से लंबे समय से चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है।

