Himachal News: हिमाचल प्रदेश में नशा तस्करों पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने चिट्टा तस्करी के एक हाई-प्रोफाइल मामले में मुख्य आरोपी शाही महात्मा समेत चार लोगों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि बरामद नशे की खेप वाणिज्यिक (Commercial) मात्रा में है। ऐसे गंभीर अपराधों में जमानत देना कानूनन सही नहीं है। न्यायाधीश विरेंदर सिंह की अदालत ने शाही महात्मा, निशांत चौहान, दीपक शर्मा और हितेश ठाकुर को राहत देने से साफ इनकार कर दिया।
नशा तस्करों की दलीलें खारिज
आरोपियों ने हाईकोर्ट में समानता के आधार पर जमानत मांगी थी। उनका तर्क था कि निचली अदालत ने इस केस के कुछ अन्य आरोपियों को जमानत दे दी है। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि निचली कोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट के कड़े नियमों की अनदेखी की है। इसलिए उस आधार पर मुख्य आरोपियों को छोड़ना सही नहीं होगा। आरोपियों ने यह भी कहा कि उनके पास से सीधे तौर पर कोई नशा नहीं मिला है। उन्हें सिर्फ बयानों और पैसों के लेनदेन के आधार पर फंसाया जा रहा है।
अंडरवियर में छिपाकर लाते थे चिट्टा
सरकारी पक्ष ने हाईकोर्ट के सामने गिरोह के काम करने का तरीका बताया। जांच में सामने आया कि आरोपी मुद्दसिर अहमद मोची दिल्ली से नशा लाता था। पुलिस ने उसके अंडरवियर में छिपाए गए प्लास्टिक लिफाफे से 468 ग्राम से ज्यादा हेरोइन (चिट्टा) बरामद की थी। वह यह नशा शाही महात्मा को सप्लाई करता था। शाही महात्मा पिछले आठ महीनों से इस धंधे में सक्रिय था। वह मोबाइल लोकेशन के जरिए अपने ग्राहकों और पेडलर्स से संपर्क करता था।
दिल्ली से रोहड़ू तक फैला था जाल
पुलिस जांच में एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। चिट्टा दिल्ली और करनाल से लाया जाता था। इसे पहले पिंजौर में एक कमरे में सुरक्षित रखा जाता था। वहां से यह नशा रोहड़ू और अन्य पहाड़ी इलाकों में सप्लाई होता था। कई बार पेडलर सीधे पिंजौर में शाही महात्मा के घर से ही ड्रग्स की खेप उठाते थे। हाईकोर्ट ने माना कि आरोपियों के खिलाफ वित्तीय लेनदेन के सबूत भी मौजूद हैं। इन तथ्यों को देखते हुए अदालत ने जमानत याचिकाएं रद्द कर दीं।

